Amit Shah Says Terrorism Biggest Enemy For Human Rights - अमित शाह ने आतंकवाद को बताया मानवाधिकार का सबसे बड़ा दुश्मन DA Image

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अमित शाह ने आतंकवाद को बताया मानवाधिकार का सबसे बड़ा दुश्मन

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गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को आतंकवाद और नक्सलवाद को मानवाधिकार का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार की रक्षा सरकार का दायित्व है। सरकार इसके प्रति कटिबद्ध है। पुलिस हिरासत में मौत के साथ ही उसकी आतंकवाद और नक्सलवाद के प्रति भी शून्य सहिष्णुता की नीति है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आायेग के 26वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे शाह ने कहा कि बीते 30 वर्षों में अकेले कश्मीर में 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत आतंकवाद के कारण हुई। नक्सलवाद के चलते कई जिले विकास से वंचित रह गए, कई लोगों की जान गई। क्या यह सब मानवाधिकारों का हनन नहीं है?

उन्होंने मानवाधिकार के वैश्विक मानकों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में अपर्याप्त बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए जो मानक बनाए गए हैं, वे भारत जैसे देश के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हम अगर इनके दायरे में रहकर मानवाधिकार पर विचार करेंगे तो हमारे देश की समस्याओं को समाप्त करने में शायद ही सफल हो पाएंगे। गृहमंत्री ने एनएचआरसी के 26 साल के सफर में आई चुनौतियों और उपलब्धियों पर चिंतन कर मानवाधिकार कानून को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा भारतीय संविधान में समाहित है। हमारे संविधान निर्माताओं ने जिस प्रकार मानवाधिकारों की रक्षा को महत्व दिया और इसकी व्यवस्था कायम की, वैसा किसी और देश में नहीं हुआ। गृहमंत्री ने दावा किया कि भारत का मानवाधिकार कानून पहले से कहीं अधिक समावेशी बन गया है।

दो टूक
केंद्र सरकार की दोनों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति।
संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानक भारतीय परिप्रेक्ष्य में पर्याप्त।

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