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इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द होने से लोकसभा चुनाव में काले धन का बढ़ेगा असर, तलाशना होगा विकल्प; अमित शाह की दो टूक

जब उनसे बॉन्ड योजना के विकल्प के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों समेत सभी हितधारकों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।

इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द होने से लोकसभा चुनाव में काले धन का बढ़ेगा असर, तलाशना होगा विकल्प; अमित शाह की दो टूक
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 27 May 2024 04:17 PM
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मानना है कि इलेक्टोरल बॉन्ड (चुनावी बॉन्ड) योजना को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस लोकसभा चुनाव में काले धन का प्रभाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि संसद को इसके विकल्प पर फैसला लेना होगा। शाह ने कहा कि अगर काले धन का प्रभाव बढ़ता है तो विकल्प तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने शनिवार को 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा कि दानदाताओं को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से बॉन्ड खरीदकर बिना पहचान जाहिर किए राजनीतिक दलों को चंदा देने की अनुमति देने वाली योजना को महत्वपूर्ण समय में रद्द किया गया। 

सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा से एक महीने पहले फरवरी में योजना को निरस्त कर दिया था। इस मुद्दे पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह मंत्री ने कहा, ''मेरा मानना है और मेरा अनुमान है कि इससे चुनाव और राजनीति में काले धन का प्रभाव बढ़ेगा। जब राजनीतिक दल इस वित्तीय वर्ष का हिसाब-किताब जमा करेंगे तो पता चल जाएगा कि कितना पैसा नकद चंदा है और कितना चेक से दिया गया है। बॉन्ड योजना के समय चेक से दान का आंकड़ा 96 प्रतिशत तक पहुंच गया था।'' शाह ने कहा, ''अब आपको पता चलेगा। अगर काले धन का प्रभाव बढ़ता है तो एक विकल्प तलाशा जाना चाहिए। संसद में चर्चा होनी चाहिए।'' 

जब गृह मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि चुनावी बॉन्ड योजना खत्म होने से इस चुनाव में काले धन का प्रभाव बढ़ेगा तो उन्होंने कहा, ''मेरा ऐसा अनुमान है।'' जब उनसे बॉन्ड योजना के विकल्प के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों समेत सभी हितधारकों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। शाह ने कहा, ''इस पर संसद में चर्चा करनी होगी। हमें सभी दलों से विचार-विमर्श करना होगा। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद से उसका रुख भी बहुत महत्वपूर्ण है। अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से भी परामर्श लेना होगा। तो हमें सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करना होगा और नए विकल्प पर निर्णय लेना होगा।'' 

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को निरस्त करते हुए कहा था कि यह सूचना के अधिकार और संविधान के तहत बोलने एवं अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उल्लंघन करती है। शीर्ष अदालत ने चंदा देने वाले सभी लोगों और राशि पाने वाले सभी दलों के नाम भी सार्वजनिक करने को कहा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि योजना का उद्देश्य राजनीति में काले धन के प्रभाव को कम करना था।