संसद के समीकरण और बड़े एजेंडे को लेकर एक्शन मोड में शाह
संसद के समीकरण और बड़े एजेंडे को लेकर एक्शन मोड में शाह - राज्यों की सियासी चहलकदमी का आंकलन करके प्रमुख एजेंडों पर आगे बढ़ने की रणनीति नई दिल्ली। पंकज कुमार पांडे अलग - अलग राज्यों में चल रही सियासी...

संसद के समीकरण और बड़े एजेंडों को लेकर एक्शन मोड में शाह - राज्यों की सियासी चहलकदमी का आंकलन करके प्रमुख एजेंडों पर आगे बढ़ने की रणनीति नई दिल्ली। पंकज कुमार पांडे
राजनीतिक चहल कदमी
अलग - अलग राज्यों में चल रही सियासी चहलकदमी का केंद्र अब दिल्ली शिफ्ट होता नजर आ रहा है । 20 जुलाई को शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक्शन मोड में आना कई बड़े सियासी घटनाक्रम का संकेत दे रहा है । मंगलवार को शाह से दिल्ली में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात हुई थी । भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी उनसे मिले। महाराष्ट्र की सियासत में काफ़ी महत्वपूर्ण किरदार बनकर उभरे उपमुख्यमंत्री शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की मुलाक़ात भी गृहमंत्री से हुई। इन मुलाकातों का भले ही अलग - अलग एजेंडा रहा हो, लेकिन एक साझा बिंदु स्पष्ट था कि आने वाले दिनों में बड़े बदलावों और चुनौतियों के लिए राज्य और केंद्र की तैयारियाँ एक लाइन पर होना चाहिए ।
महत्वपूर्ण विधेयक
केंद्र सरकार सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है । इनमें नारी वंदन संशोधन अधिनियम और परिसीमन विधेयक शामिल है । लेकिन यह तभी संभव होगा जब नंबर को लेकर केंद्र सरकार आश्वस्त हो। साथ ही केंद्रीय स्तर पर मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार के साथ बीजेपी की नई केंद्रीय टीम का गठन भी लंबित है। इन सभी एजेंडा पर आगे बढ़ने के लिए अलग अलग स्तरों पर कई बैठकों का दौर पूरा हो चुका है ।
एनडीए की ताकत
सूत्रों ने कहा, केंद्र के सामने सबसे बड़ा एजेंडा फिलहाल लोकसभा और संसद में एनडीए की ताक़त बढ़ाना है। तृणमूल का बड़ा धड़ा एनडीए के साथ आया है। शिवसेना उद्धव गुट के छह सांसद टूटकर एकनाथ शिंदे के साथ आए हैं और माना जा रहा है कि अब वे एनडीए के साथी होंगे। महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी को लेकर भी तरह - तरह की अटकलें हैं। पवार गुट के कई नेता एनडीए के साथ आने की इच्छा जता रहे हैं।
संख्याबल का विश्लेषण
केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा , संसद में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि इस नए समीकरण के सहारे वह अपने कई प्रमुख एजेंडों को सफलता पूर्वक आगे बढ़ाने में सक्षम हो। हालांकि अभी भी संवैधानिक बदलाव के लिए जरूरी संख्या बल पूरा नहीं हुआ है ।
बैठकें और फीडबैक
सूत्रों ने कहा कि शाह सभी प्रमुख राजनीतिक एजेंडों के मद्देनजर लगातार बैठकें कर रहे हैं । इसके अलावा अलग अलग स्तरों पर भी कई अन्य बैठकें पर्दे के पीछे हो रही हैं।
उत्तरप्रदेश चुनाव की तैयारी
योगी की मुलाक़ात पर सूत्रों ने कहा , उत्तरप्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव मोदी सरकार के लिए बहुत अहम है । प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान खोई जमीन को वापस लाने की चुनौती पार्टी और सरकार के सामने है। अभी प्रदेश में नई टीम बनी है। इस टीम को भी जिम्मेदारी देकर सक्रियता बढ़ानी है। आने वाले दिनों में प्रदेश में चुनावी कवायद अचानक काफ़ी तेज होगी। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि प्रदेश का सही जमीनी फीडबैक सामने रखकर एक टीम के रूप में चुनाव लड़ा जाए। प्रदेश में मतभेद दूर करना केंद्र की प्राथमिकता है। जिसकी कवायद नितिन नवीन के यूपी दौरे के वक्त नजर आई थी। इसके अलावा सरकार विपक्ष द्वारा उठाये जाने वाले संभावित मुद्दों से निपटने की भी तैयारी कर रही है। सरकार को पता है कि संसद सत्र के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा विपक्ष जोर शोर से उठाएगा । स्वयं प्रधानमंत्री की निगाह पूरे मामले पर है। मामला कोर्ट में भी है । केंद्र इस मामले में बहुत साधे हुए तरीके से आगे बढ़ना चाहता है। इस संबंध में भी मुख्यमंत्री से फीडबैक लिया गया है। साथ ही केंद्र ने अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी हासिल की है。
दूसरे दलों का संपर्क
सूत्रों ने यह भी दावा किया कि उत्तरप्रदेश में कई अन्य दलों के नेता भाजपा नेतृत्व के संपर्क में बताए जा रहे हैं उनको लेकर भी केंद्रीय स्तर पर फीडबैक लिया जा रहा है।
महाराष्ट्र की सियासत
महाराष्ट्र इस समय सबसे ज़्यादा चर्चा में है । क्योंकि तृणमूल के बाद अब सबसे बड़ी चहलक़दमी वहाँ देखने को मिल रही है। मंगलवार को एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव गुट के छह बागी सांसद भी शाह के साथ मुलाकात में मौजूद थे।
अगले कदम
सूत्रों ने कहा संसद सत्र के पहले अभी और भी चहलकदमी देखने को मिलेगी
केंद्र सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से भी लगातार संपर्क बनाए हुए है और इसके लिए पर्दे के पीछे कई दौर की बातचीत चल रही है।
क्या है संसद का समीकरण
सूत्रों के अनुसार, अब तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 299 सांसदों के अलावा एनसीपीआई के 20 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के 4 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह सरकार के पक्ष में कुल 323 सांसद दिखाई दे रहे हैं।
यदि लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या पूरी रहती है, तो संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में सरकार की नजर अब उन दलों पर है जिनका रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
डीएमके की स्थिति
सबसे अधिक चर्चा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के 22 सांसदों को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डीएमके विधेयक का समर्थन करेगी, विरोध करेगी या मतदान से दूरी बनाए रखेगी। इसी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के 8 सांसदों का रुख भी काफ़ी महत्वपूर्ण होगा। एनसीपी पवार गुट के नेताओं की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाक़ात और पवार की सक्रियता से कई तरह की अटकलों को बल मिला है।
राजनीतिक जानकारों का विश्लेषण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ये दल साथ आते हैं तो संसद में सरकार की राह आसान हो सकती है। वहीं यदि वे मजत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान में हिस्सा नहीं लेते, तो प्रभावी सदस्य संख्या कम होने से दो-तिहाई बहुमत का आवश्यक आंकड़ा भी घट सकता है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार विभिन्न विपक्षी दलों के साथ लगातार संवाद में है ऐसे में लोकसभा का अंकगणित आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है।


