बंगाल की कानून व्यवस्था पर शाह ने की बैठक
--राज्य की सीमा बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी है --गृहमंत्री ने सीमा पर सुरक्षा

कोलकाता, एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर बैठक की। राज्य की सीमा बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी है और इसकी सीमाएं नेपाल और भूटान से भी लगती हैं। सूत्रों ने बताया कि दक्षिण कोलकाता में हुई इस बैठक में मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, गृह सचिव संघमित्रा घोष, राज्य पुलिस प्रमुख सिद्धार्थ नाथ गुप्ता और आईजीपी (सीआईडी) एन.आर. बाबू भी शामिल हुए। यह बैठक ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम’ के पारित होने के कुछ हफ्ते बाद हुई है। इस कड़े कानून ने संगठित अपराध, जबरन वसूली, अवैध खनन, साइबर अपराध और सार्वजनिक अव्यवस्था से निपटने के लिए राज्य की शक्तियों को काफी बढ़ा दिया है。
बीएसएफ सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण
राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर गए अमित शाह ने उत्तर बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और बीएसएफ के लिए 77.06 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। गृह मंत्रालय के अनुसार, अमित शाह ने सिलीगुड़ी के पास बीएसएफ की एक चौकी का दौरा किया। उन्होंने स्वदेशी और अत्याधुनिक सीमा सुरक्षा तकनीकों का निरीक्षण किया, जिसमें रेडियो-आधारित ‘फेंस ब्रीच डिटेक्शन सिस्टम’ (बाड़ तोड़ने का पता लगाने वाला सिस्टम) भी शामिल था। यह सिस्टम बाड़ के साथ छेड़छाड़ होने पर तुरंत जवानों को सतर्क कर देता है। उन्होंने 47 करोड़ रुपये की तीन बीएसएफ परियोजनाओं और बंगाल में सीमा पर दो चौकियों के लिए अधिग्रहित जमीन पर 30 करोड़ रुपये की लागत से चार किलोमीटर लंबी सीमा बाड़ के निर्माण की आधारशिला भी रखी।
भाषा संग्रहालय ‘शब्दलोक’ का शुभारंभ
केंद्रीय गृह मंत्री ने नेशनल लाइब्रेरी परिसर में भारत के पहले भाषा संग्रहालय ‘शब्दलोक’ का उद्घाटन किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में नेशनल लाइब्रेरी द्वारा विकसित यह संग्रहालय भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को दिखाता है। ‘शब्दलोक’ का पहला चरण भारतीय भाषाओं, लिपियों और साहित्य की विविधता को दर्शाता है। इस संग्रहालय में नौ गैलरी हैं, जो भाषाओं के इतिहास के विभिन्न पहलुओं और भारत की सभ्यता व संस्कृति पर उनके प्रभाव को उजागर करती है। इसका उद्देश्य भाषा को एक जीवंत इकाई के रूप में प्रस्तुत करना है, जिसने लगातार समाज को आकार दिया है।


