सीएम योगी से बात कराने की मांग को लेकर 3 घंटे एंबुलेंस से नहीं उतरने दिया शिवानंद का शव
सुरौली के शिवानंद चौरसिया, जो ओमान में अमेरिकी हमले का शिकार हुए, का शव बुधवार को गांव पहुँचा। परिवार ने शव को एंबुलेंस से उतारने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की मांग की। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने को मंजूरी मिली।
सुरौली/देवरिया, वाचस्पति मिश्र। होर्मुज के समीप ओमान में वाणिज्यिक पोत एमटी सेटेबेलो पर हुए अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले सुरौली के शिवानंद चौरसिया का शव बुधवार की शाम करीब 6 बजे गांव पहुंचा। शव गांव पहुंचते ही मातम छा गया। चारो तरफ केवल चीत्कार ही सुनाई देने लगा। उधर परिवार के लोगों ने एंबुलेंस से शव निकालने से मना कर दिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करने की जिद पर अड़ गए। कई बार प्रशासन के अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद डीएम मधुसूदन हुल्गी व एसपी अभिजीत आर शंकर पहुंचे। उन्होंने पत्नी सुशीला और अन्य परिजनों से बातचीत कर उनकी मांगों का पत्रक लिया।
जिलाधिकारी के आश्वासन पर रात करीब 9 बजे परिजन शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने को तैयार हुए।
अमेरिकी नौसेना के हमले में मौत
10 जून को ओमान तट के पास वाणिज्यिक पोत पर अमेरिकी नौसेना के हमले में चालक दल के सदस्यों में शामिल शिवानंद चौरसिया समेत तीन लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से ही शव स्वदेश मंगाने की मांग चल रही थी। डीएम मधुसूदन हुल्गी व सांसद शशांक मणि त्रिपाठी के प्रयास से विदेश मंत्रालय सक्रिय हुआ और लगातार परिवार के लोगों से संपर्क में था। बुधवार की सुबह ओमान एयर की फ्लाइट के माध्यम से मस्कट से भारत भेजा गया। दिल्ली से शाम को शव गोरखपुर पहुंचा और वहां से छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया समेत अन्य लोग एंबुलेंस के जरिये शव गांव लाए। शव आने की सूचना के बाद से ही हजारों लोग दरवाजे पर पहुंच गए थे। जैसे ही एंबुलेंस दरवाजे पर पहुंचा, लोग मौके पर पहुंच गए और एक झलक पाने के लिए परेशान हो गए। लेकिन परिवार के लोग शव एंबुलेंस से उतारने से रोक दिया।
परिवार की मांगें
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे बातचीत करें और उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दें, तभी वह शव को उतारेंगे। उनकी मांगों में पत्नी को सरकारी नौकरी, परिजनों को एक करोड़ का मुआवजा, बच्चों की परवरिश समेत अन्य मांगें थी। डीएम ने उनकी मांगों का पत्रक लेते हुए यथासंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया जिसके बाद परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने को तैयार हुए।
ताबूत से लिपट कर बिलख पड़ी पत्नी व बहन
शिवानंद का शव शाम को अंधेरा होने से पहले गांव पहुंचा। जैसे ही ताबूत नीचे उतारा गया, वैसे ही बहन व पत्नी आगे बढ़ गई। पत्नी पति के ताबूत से लिपट गई और दहाड़ मारकर रोने लगी। लोग उसे हटाने का प्रयास करते, वह हटने की बजाय ताबूत पकड़ कर रोने लगती। रोते-रोते वह बेहोश हो जाती, लेकिन पति के ताबूत को नहीं छोड़ती। लोग पानी का छींटा मारकर उसे होश में लाते। यही हाल बहन का भी था, वह भी भाई के ताबूत से लिपट कर रो रही थी। वह बोल रही थी कि रक्षा बंधन में आने का वादा आपने दिया था, लेकिन आप उसके पहले ही हमें छोड़ दिए। बहन को रोता देख वहां मौजूद अन्य लोगों की भी आंखें भर आई। बहन व पत्नी की स्थिति पागलों की तरह हो गई थी, किसी तरह उन्हें लोगों ने समझा-बुझाकर शव से अलग किया। पिता रामजी बेटे के ताबूत को वह देख रहे थे और उनके आंखों से आंसू गिर रहा था। गांव के लोग उन्हें दिलासा देकर समझाने का प्रयास करते, लेकिन उनके आंखों के आंसू रुक नहीं रहे थे।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
दिन भर जमे रहे जनप्रतिनिधि। शिवानंद का शव आने की सूचना के बाद से ही दरवाजे पर रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया, भाजपा नेता राजन यादव, गोविंद चौरसिया, सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह खोखा, सपा जिलाध्यक्ष ब्यास यादव समेत अन्य लोग पहुंच गए। देर रात तक यह जमे रहे। शिवानंद को श्रद्धांजलि दी और नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
पुलिस की तैनाती
कई थानों की पुलिस रही तैनात। अमेरिका को लेकर लोगों में दिख रहे आक्रोश को लेकर जिला प्रशासन इस प्रकरण में पूरी तरह से गंभीर दिखा। दो सीओ के साथ ही जिले के कई थानों की पुलिस सुबह से ही तैनात कर दी गई। सुरौली के अलावा बरहज, एकौना, रुद्रपुर, महुआडीह, श्रीरामपुर समेत कई थानों की पुलिस जगह-जगह तैनात की गई थी, ताकि किसी तरह की दिक्कत न आए।
पोस्टमार्टम के बिना शव की वापसी
बिना पोस्टमार्टम के पहुंचा था शिवानंद का शव। दूतावास से आए कागजात में यह पूछा गया था कि शव पोस्टमार्टम होने के बाद चाहिए या बिना पोस्टमार्टम के। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव का कालम भर दिए। इसलिए बिना पोस्टमार्टम के ही शव गांव पहुंचा। कुछ लोग पोस्टमार्टम कराने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार करने की राय परिवार के लोगों को दे रहे थे। प्रशासन भी पोस्टमार्टम कराने को तैयार दिखा।
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