कम ऊर्जा में बनेंगे पर्यावरण अनुकूल रसायन, किए जा सकेंगे रिएक्टर विकसित
एलोवेरा से तैयार ग्राफीन और एथिडियम ब्रोमाइड को मिलाकर हाइब्रिड सामग्री हुई विकसित पर्यावरण के अनुकूल रसायन बनाने में मिलेगी मदद बेंजीलेमाइन को बदलने

गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। एलोवेरा से तैयार ग्राफीन भविष्य में ऐसी तकनीक बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें कम रोशनी की ऊर्जा से रासायनिक पदार्थ तैयार किए जा सकेंगे और रासायनिक प्रक्रियाएं चलाई जा सकेंगी। इससे भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल रसायन बन सकेंगे। साथ ही कम प्रकाश की मदद से काम करने वाले छोटे-बड़े रासायनिक रिएक्टर विकसित किए जा सकेंगे। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधकर्ताओं ने इसे लेकर एलोवेरा से तैयार ग्राफीन और एथिडियम ब्रोमाइड को मिलाकर हाइब्रिड सामग्री विकसित की है, जो सामान्य दिखाई देने वाली रोशनी की ऊर्जा का इस्तेमाल रासायनिक प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने में करती है।
यह शोधपत्र
यह शोधपत्र स्प्रिंगर के जर्नल ऑफ इनऑर्गेनिक एंड ऑर्गेनोमेटेलिक पॉलिमर्स एंड मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ है। शोध में प्रो. डीके द्विवेदी, प्रो. राजेश कुमार, श्रेया मौर्य, यादव, शैफाली मिश्रा, कंचन शर्मा, अनुपमा यादव, गीता श्रीवास्तव, ज्योति अग्रवाल, नवनीत कुमार गुप्ता सहित दक्षिण कोरिया के जिन-ऊक बेग भी शामिल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि अभी यह तकनीक प्रयोगशाला स्तर पर है। लेकिन शोध में सफलता मिलने पर कम ऊर्जा में उपयोगी रसायन बनाने की प्रक्रियाएं, प्रकाश से चलने वाले रासायनिक रिएक्टर और पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक तकनीक विकसित की जा सकती हैं। इससे रासायनिक उद्योग में ऊर्जा की खपत और कुछ प्रक्रियाओं से होने वाले पर्यावरण प्रभाव को कम किया जा सकता है।
एलोवेरा शोध के लिए टिकाऊ पौधा
शोधकर्ताओं ने बताया कि एलोवेरा आसानी से उपलब्ध पौधा है। इससे ग्राफीन तैयार कर उसे प्रकाश आधारित रासायनिक प्रक्रिया में इस्तेमाल करना इस शोध को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल तकनीक की दिशा से जोड़ता है। यदि भविष्य में इसका बड़े स्तर पर उत्पादन आसान और किफायती साबित होता है तो इसका औद्योगिक इस्तेमाल भी संभव हो सकता है।
मेरे शोध का उद्देश्य
एमएमएमयूटी का यह शोध पर्यावरण और औद्योगिक तकनीक के अनुकूल है। इससे भविष्य में प्रकाश से चलने वाले रासायनिक रिएक्टर विकसित किए जा सकेंगे। एमएमएमयूटी के शिक्षक समाजिक मुद्दों को ध्यान में रखकर शोध कर रहे हैं। इसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है।
-डॉ. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी


