निवेश के नाम पर जमीन की लूट बर्दाश्त नहीं: तिवारी
अल्मोड़ा में उपppa संस्थापक पीसी तिवारी ने निवेश के नाम पर सरकारी जमीन की लूट का आरोप लगाया है। उन्होंने यूआईआईडीबी के जरिये 7000 बीघा भूमि को पीपीपी मॉडल पर देने का विरोध किया है। तिवारी का कहना है कि ये जमीनें स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं और सरकार को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए।

अल्मोड़ा। उपपा संस्थापक व संयोजक पीसी तिवारी ने निवेश के नाम पर जमीन की लूट का आरोप लगाया है। उन्होंने यूआईआईडीबी के माध्यम से करीब सात हजार बीघा सरकारी भूमि को पीपीपी मॉडल पर देने का विरोध किया है। कहना है कि जिस जमीन के लिए जनता ने कांग्रेस सरकार के समय नैनीसार बचाओ, उत्तराखंड बचाओ आंदोलन चलाया था, आज उसी तरह की नीति को लागू करने की तैयारी हो रही है। नैनीसार आंदोलन ने प्रदेश में सशक्त भू-कानून और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकार के सवाल को व्यापक जनमुद्दा बनाया था। ऐसे में सशक्त भू-कानून की बात करने वाली सरकार हजारों बीघा सरकारी भूमि को निजी हाथों में देने को तैयार है।
कहा कि 90 साल की लीज केवल वर्तमान सरकार का फैसला नहीं है, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के भूमि अधिकारों को प्रभावित करने वाला निर्णय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन किसे, किन शर्तों पर और किस दर पर दी जा रही है। भूमि का पूरा विवरण, लीज की शर्तें, प्रक्रिया और संभावित लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए तथा इस पर खुली बहस होनी चाहिए। कहा कि पार्टी इस मुद्दे को भी उत्तराखंड के अस्तित्व, भूमि अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल बनाकर जनता के बीच ले जाएगी।


