अस्थायी नहीं हो सकती मृतक आश्रित कोटे की नियुक्ति : हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे के तहत दी जाने वाली नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा पर मिलने वाली नियुक्तियां हमेशा नियमित और स्थायी होती हैं, इसलिए अस्थायी सेवा की शर्त जोड़ना गैरकानूनी है। सरकार को इस प्रक्रिया में सुधार करने का निर्देश दिया गया है।

-नियुक्ति पत्र में लिखी शर्त, यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है, जो किसी भी समय समाप्त की जा सकती है -कोर्ट ने कहा कि पीठ इस बात को समझने में असमर्थ है कि मृतक आश्रित नियुक्ति में ऐसी शर्त कैसे शामिल की गई
नियमित और स्थायी नियुक्तियाँ
-अपर महाधिवक्ता ने भी माना कि नियुक्ति पत्र में यह शर्त जोड़ा जाना पूरी तरह अनुचित और कानूनन गलत है
प्रयागराज, विधि संवाददाता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे के तहत दी जाने वाली नियुक्तियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली नियुक्तियां हमेशा स्वीकृत पदों पर नियमित और स्थायी प्रकृति की होती हैं इसलिए इनमें अस्थायी सेवा की शर्त जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी है।
कोर्ट का फैसला
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने आगरा की सपना सारस्वत की याचिका पर उनके अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी व अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना को सुनकर दिया है। कोर्ट के गत 13 अगस्त के आदेश के तहत हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची को गत 27 अगस्त को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है।
इस पर याची के अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट को बताया कि नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-1 में लिखा गया है कि यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है, जो बिना कोई कारण बताए किसी भी समय एक माह के नोटिस पर समाप्त की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पीठ इस बात को समझने में असमर्थ है कि मृतक आश्रित नियुक्ति में ऐसी शर्त कैसे शामिल की गई क्योंकि यह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।
सरकार को निर्देश
अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना ने भी माना कि नियुक्ति पत्र में यह शर्त जोड़ा जाना पूरी तरह अनुचित और कानूनन गलत है। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि लगभग सभी सरकारी विभागों में एक तय प्रारूप (फॉर्मेट) का पालन किया जा रहा है, जिससे यह शर्त लग गई।
अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस मामले को शासन स्तर पर उठाया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी अनुकंपा नियुक्ति में ऐसी शर्त न जोड़ी जाए। साथ ही याची को इस शर्त को हटाकर संशोधित नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन को देखते हुए संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि नियमित पद के बावजूद यह अस्थायी शर्त क्यों जोड़ी गई। साथ ही अगली तारीख पर संशोधित नियुक्ति पत्र भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का आदेश दिया。


