आशाओं की दस्तक से ‘ई-कवच’ पर अलीगढ़ का डंका
अलीगढ़ ने दस्तक अभियान में 51 प्रतिशत डेटा अपलोड करके प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। मलेरिया विभाग और आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह संभव हुआ। अभियान में 1 से 10 प्रतिशत डेटा अपलोडिंग से शुरुआत करने के बाद, तीन दिन में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत तक पहुँच गया।

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। दस्तक अभियान में अलीगढ़ ने वह कर दिखाया, जो प्रदेश के बड़े-बड़े जिले नहीं कर सके। अभियान की शुरुआत में 1 से 10 प्रतिशत डेटा अपलोडिंग के साथ पिछड़ रहा जनपद महज तीन दिन में ऐसी रफ्तार से आगे बढ़ा कि ‘ई-कवच’ पोर्टल पर 51 प्रतिशत ऑनलाइन फीडिंग के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में पहले पायदान पर पहुंच गया। इस उपलब्धि के पीछे मलेरिया विभाग की रणनीति से कहीं अधिक आशा कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत रही, जिन्होंने घर-घर पहुंचकर सर्वे किया और मौके पर ही मोबाइल से रियल-टाइम डेटा अपलोड किया। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए 11 जुलाई से चल रहे दस्तक अभियान में अलीगढ़ ने डिजिटल रिपोर्टिंग का नया रिकॉर्ड कायम किया है। ‘ई-कवच’ पोर्टल पर रियल-टाइम डेटा अपलोडिंग में जिला 51 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में पहले स्थान पर पहुंच गया है। अभियान के शुरुआती तीन दिनों तक जिले की प्रगति केवल 1 से 10 प्रतिशत के बीच थी, लेकिन मलेरिया विभाग ने फील्ड मॉनिटरिंग बढ़ाई, तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराया और आशा कार्यकर्ताओं को लगातार प्रोत्साहित किया। इसका परिणाम यह रहा कि जनपद ने रिकॉर्ड समय में लंबी छलांग लगाते हुए प्रदेश की शीर्ष रैंक हासिल कर ली। रिपोर्ट के अनुसार जिले में 10,91,392 परिवार चिह्नित हैं। इनमें से 41,114 घरों तक आशा कार्यकर्ता पहुंच चुकी हैं। सर्वे के दौरान 4,255 घर ऐसे मिले, जहां मच्छरों के प्रजनन या अन्य स्वास्थ्य जोखिम पाए गए। जिले की कुल 3254 आशाओं में से 1673 आशाओं ने अभियान की ऑनलाइन फीडिंग शुरू कर दी, जिसके चलते ई-कवच पोर्टल पर अपलोडिंग 51 प्रतिशत तक पहुंच गई। प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में अलीगढ़ के शीर्ष पर पहुंचने के बाद विभाग में उत्साह का माहौल है। अब विभाग का लक्ष्य शत-प्रतिशत सर्वे और डेटा अपलोडिंग पूरा कर दस्तक अभियान को प्रदेश का मॉडल बनाना है。
आशाओं की मेहनत ने बदली तस्वीर
दस्तक अभियान की सबसे बड़ी ताकत जिले की 3254 आशाएं रहीं। इनमें 2834 देहात व 420 शहर में कार्यरत हैं। तेज धूप, उमस और लगातार फील्ड ड्यूटी के बावजूद उन्होंने गांव-गांव और शहर की गलियों में घर-घर दस्तक देकर सर्वे पूरा किया। प्रत्येक परिवार में बुखार, टीबी के संभावित लक्षण, कुपोषित बच्चों और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जानकारी जुटाई गई। इतना ही नहीं, सर्वे समाप्त होने का इंतजार किए बिना मौके पर ही मोबाइल फोन से ई-कवच पोर्टल पर रियल-टाइम डेटा दर्ज किया गया। इसी तेज ऑनलाइन फीडिंग ने अलीगढ़ को प्रदेश में नंबर-1 बनाया।
टीमवर्क बना जीत का मंत्र (फोटो)
जिला मलेरिया अधिकारी विनीता मिश्रा ने बताया कि यह सफलता किसी एक अधिकारी या एक टीम की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की साझा उपलब्धि है। जिला स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक अधिकारियों ने प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा की। जहां भी किसी आशा को तकनीकी दिक्कत आई, उसे तत्काल दूर कराया गया। ऑनलाइन एंट्री की गति बढ़ाने के लिए नियमित फॉलोअप कर फील्ड से लेकर कंट्रोल रूम तक समन्वय बनाए रखा गया। यही वजह रही कि शुरुआती सुस्ती के बाद डेटा अपलोडिंग में अप्रत्याशित तेजी आई और जिला सीधे प्रदेश के पहले स्थान पर पहुंच गया। आगे भी यही तकनीक अपनाकर शत-प्रतिशत सर्वे और समयबद्ध ऑनलाइन रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी, ताकि संक्रामक रोगों की रोकथाम और अधिक प्रभावी बन सके।
बीमारियों पर ऑनलाइन निगरानी
ई-कवच पोर्टल पर तत्काल डेटा दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग को यह पता चलता है कि किस क्षेत्र में बुखार, टीबी, कुपोषण या मच्छरजनित रोगों का खतरा अधिक है। इसके आधार पर चिकित्सा टीमें तुरंत कार्रवाई कर सकती हैं। अलीगढ़ ने इसी डिजिटल व्यवस्था को सबसे प्रभावी ढंग से लागू किया। रियल-टाइम फीडिंग के कारण जिले की रिपोर्टिंग लगातार बेहतर हो रही है। अधिकारियों का कहना है जितनी तेज डेटा एंट्री होगी, उतनी ही तेजी से बीमारी की रोकथाम के लिए संसाधन और टीमें प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगी।
डेटा अपलोडिंग में प्रदेश के टॉप-10 जिले
रैंक, जनपद, अपलोडिंग
1, अलीगढ़, 51.0%
2, मुरादाबाद, 48.5%
3, सहारनपुर, 46.2%
4, बुलंदशहर, 45.0%
5, आगरा, 43.8%
6, बरेली, 42.1%
7, मेरठ, 41.5%
8, गाजियाबाद, 40.2%
9, झांसी, 39.7%
10, गोरखपुर, 38.0%
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प्रदेश के 5 सबसे पिछड़े जिले
नीचे से रैंक, जनपद, अपलोडिंग
71, बलरामपुर, 12.5%
72, श्रावस्ती, 11.0%
73, बहराइच, 9.8%
74, सोनभद्र, 8.5%
75, चंदौली, 6.2%
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अलीगढ़ के प्रमुख आंकड़े (रिपोर्ट के अनुसार)
कुल चिन्हित परिवार : 10,91,392
आशाओं द्वारा विजिट किए गए घर : 41,114
संवेदनशील/पॉजिटिव घरों की पहचान : 4,255
जिले की कुल आशा कार्यकर्ता : 3,268
अभियान शुरू करने वाली आशाएं : 1,673
ई-कवच पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग : 51% (प्रदेश में प्रथम)
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लेखक के बारे में
Lokesh Sharmaसंक्षिप्त परिचय लोकेश शर्मा पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान समूह) में स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
लोकेश शर्मा प्रिंट मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्हें पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं और प्रमुख रूप से स्वास्थ्य विभाग देख रहे हैं। खोजी पत्रकार के रूप में उन्होंने पाठकों की रुचि और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ बनाई है।
कार्य यात्रा
लोकेश शर्मा ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत वर्ष 2010 में दैनिक जागरण से की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बुनियादी समझ विकसित की। वर्ष 2010 से 2013 तक हाथरस में सक्रिय संवाददाता रहे। इसके बाद अलीगढ़ में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए लगभग छह वर्षों तक अपराध और न्यायालय संबंधी विषयों की गहन रिपोर्टिंग की। जनवरी 2025 से वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और वर्तमान में स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पिछले एक साल में तीन अभियान चलाए, जिनका व्यापक असर हुआ।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि एवं रिपोर्टिंग क्षेत्र
राजनीति शास्त्र में स्नातक और जनसंचार में परास्नातक शिक्षा ने उन्हें राजनीति और पत्रकारिता की समझ का संतुलित दृष्टिकोण प्रदान किया। विभिन्न विषयों पर पकड़ के साथ वे कृषि, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित व अनुसंधान आधारित व्याख्यात्मक समाचार लिख रहे हैं।
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