Air Mshl RKS Bhadauria Dream To Fly Plane in His Childhood - बाबा की गोद में हवाईजहाज उड़ाने के सपने देखते थे एयर मार्शल राकेश DA Image

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बाबा की गोद में हवाईजहाज उड़ाने के सपने देखते थे एयर मार्शल राकेश

rks bhadauria   iaf mcc twitter 19 sep  2019

भदौरिया परिवार के कई लोग पैतृक गांव कोरथ के साथ-साथ इटावा और ग्वालियर में भी निवासरत हैं। कई लोगों के जेहन में अब भी बचपन की यादें ताजा हैं। पिता सूरजपाल सिंह एयरफोर्स में मास्टर वारंट अफसर थे। उनका गांव आना छुट्टियों में ही होता था। बाबा सोबरन सिंह की गोद में खेलते राकेश भदौरिया अक्सर आसमान में उड़ते हवाई जहाजों पर टकटकी लगाए रहते थे और कहते थे कि वह भी विमान में उड़ान भरेंगे। सेना में जाएंगे।

परिवार में देशभक्ति का माहौल था। चाचा संतोष सिंह (एयरफोर्स), अरविंद सिंह (सेना-सूबेदार) और देशपति सिंह (रेलवे) में कार्यरत थे। जब भी परिवार इकट्ठा होता था, देशभक्ति पर ही बात होती थी। पिता के साथ रहने के कारण राकेश भदौरिया की पढ़ाई अलग-अलग स्थानों पर हुई लेकिन उनकी प्रतिभा में निखार नेशनल डिफेंस अकादमी में आया। भदौरिया की बेटी सोनाली पायलट हैं।

स्क्वॉड्रन लीडर (रिटायर) एके सिंह का कहना था कि आरकेएस भदौरिया भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलट हैं। उन्होंने कई मोर्चों पर भारत का सम्मान बढ़ाया है। वह भारतीय सेना के गौरव हैं। उनके वायुसेना अध्यक्ष बनने पर आगरा का निवासी होने के नाते मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है।

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प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह भदौरिया कहते हैं कि यह बाह के लिए ही नहीं पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उनके साथ हमारे पारिवारिक संबंध हैं। पारिवारिक कार्यक्रमों में आनाजाना रहता है। इसलिए हमारे लिए यह व्यक्तिगत खुशी का अवसर भी है। बाह की धरती का सेना में स्वर्णिम इतिहास है। उनके वायु सेना प्रमुख बनने से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।

बाह की विधायक पक्षालिका सिंह का कहना था कि राकेश सिंह भदौरिया ने अपनी मेहनत, लगन और शौर्य के बल पर वायु सेना का सर्वोच्च पद हासिल किया है। यह गौरव की बात है। बाह शूरवीरों की धरती है। बाह के लोगों ने सेना में रहकर देश की सेवा की है। अब राकेश कुमार सिंह से प्रेरणा लेकर युवा नेवी और एयरफोर्स की ओर भी रुख करेंगे।

वीर जवानों का गांव है कोरथ
जैतपुर ब्लॉक का छोटा सा गांव कोरथ वीरों के लिए जाना जाता है। यहां के कई परिवार सेना से जुड़े हैं। लड़ाई चाहे चीन से हो या फिर पाकिस्तान से। यहां के वीरों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं। बीस साल पहले हुई कारगिल की लड़ाई में यहां के लाल लायक सिंह भदौरिया ने शहादत दी थी। बड़ी संख्या में यहां के युवक सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

गांव में लायक सिंह भदौरिया का स्मारक है। गांव के युवक उनसे प्रेरणा लेते हैं। अब राकेश सिंह भदौरिया के एयर चीफ मार्शल बनने से लोगों का सिर फिर गर्व से ऊंचा हुआ है। राकेश सिंह के रिश्तेदार हरेंद्र सिंह सन् 1962 में चीन से लड़ाई लड़ चुके हैं। गांव में इस समय 11 परिवार पूर्व सैनिकों के हैं। सुबह और शाम यहां के युवक सैन्य सेवा में भर्ती के लिए सड़क किनारे दौड़ लगाते देखे जा सकते हैं।

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