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तीन तलाकः SC में AIMPLB की दलील, यह विश्वास का मामला, 1400 सालों से चल रही प्रथा

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक मसले पर सुनवाई जारी है। आज 15 मई को सुनवाई के चौथे दिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने अपना पक्ष रखा। एआईएमपीएलबी ने कोर्ट को बताया कि मुसलमान पिछले 1400...

तीन तलाकः SC में AIMPLB की दलील, यह विश्वास का मामला, 1400 सालों से चल रही प्रथा
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लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीTue, 16 May 2017 01:21 PM
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सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक मसले पर सुनवाई जारी है। आज 15 मई को सुनवाई के चौथे दिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने अपना पक्ष रखा। एआईएमपीएलबी ने कोर्ट को बताया कि मुसलमान पिछले 1400 सालों से तीन तलाक प्रथा का पालन कर रहे हैं और यह विश्वास का मामला है।

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान AIMPLB के वकील ने कपिल सिब्बल ने दलीलें रखी। सिब्बल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट से कहा कि , तीन तलाक सन 637 से है। इसे गैर-इस्लामी बताने वाले हम कौन होते हैं। मुस्लिम बीते 1,400 वषोर्ं से इसका पालन करते आ रहे हैं। यह आस्था का मामला है। इसलिए इसमें संवैधानिक नैतिकता और समानता का कोई सवाल नहीं उठता।  

उन्होंने एक तथ्य का हवाला देते हुए कहा कि तीन तलाक का स्रोत हदीस पाया जा सकता है और यह पैगम्बर मोहम्मद के समय के बाद अस्तित्व में आया।

अपनी दलील के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ था अगर इस पर हिन्दुओं को विश्वास है और इस पर कोई सवाल नहीं उठाता। ठीक उसी प्रकार तीन तलाक मुस्लिमों के विश्वास का मामला है और इस पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। 

मुस्लिम संगठन ने ये दलीलें जिस पीठ के समक्ष दी उसका हिस्सा न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर भी हैं।

 सोमवार को केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा था कि यदि तीन तलाक समेत तलाक के सभी रूपों को खत्म कर दिया जाता है तो मुस्लिम समुदाय में निकाह और तलाक के नियमन के लिए वह नया कानून लेकर आएगा।   तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई का आज चौथा दिन है। जिस पीठ के समक्ष यह सुनवाई हो रही है उसमें सिख, ईसाई, पारसी, हिंदू और मुस्लिम समेत विभिन्न धार्मिक समुदायों के सदस्य शामिल हैं।