25 एकड़ जमीन की तलाश में एम्स, मंत्रालय तक पहुंचा मामला
गोरखपुर में एम्स में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनाने के लिए 25 एकड़ जमीन का मामला स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच गया है। एम्स के अध्यक्ष डॉ. हेमंत कुमार ने बताया कि जमीन न मिलने से सेवाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही जमीन मिल जाएगी।

गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। एम्स में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनाने के लिए 25 एकड़ जमीन का मामला स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय में बताया गया है कि जमीन न मिलने की वजह से सुपर स्पेशियलिटी वार्ड नहीं बन पा रहा है। इस वार्ड के बनने से अन्य सेवाओं का विस्तार भी एम्स में होना है। इसकी जानकारी एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. डॉ. हेमंत कुमार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित सीएम योगी आदित्यनाथ को दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और सीएम की पहल पर जल्द ही एम्स को जमीन मिल जाए। एम्स में दिनों दिन मरीजों का लोड बढ़ता जा रहा है। ओपीडी की स्थिति यह है कि हर दिन चार हजार से अधिक मरीज एम्स में पहुंच रहे हैं। कभी-कभी यह ओपीडी पांच हजार के पार भी चली जाती है। इमरजेंसी और ट्रामा की स्थिति का भी यही हाल है। ट्रामा में 68 बेड हैं, जो हर समय में मरीजों से भरे रहते हैं। एम्स की बात करें तो इस 632 बेड संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 75 बेड आईसीयू के हैं, जिसके लिए सबसे अधिक मारा-मारी है。
भूमि विवाद
इसके अलावा ट्रामा एंड इमरजेंसी में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसकी वजह से मरीजों को आए दिन एम्स से रेफर करना मजबूरी हो गई है। इसे देखते हुए एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. डॉ. हेमंत कुमार ने 200 बेड के सुपर स्पेशियलिटी वार्ड बनाने की तैयारी शुरू की।लेकिन, तैयारी के दौरान पता चला कि एम्स कैंपस में इसके लिए जमीन ही नहीं है। क्योंकि, एम्स के पास करीब 100 एकड़ के आसपास ही जमीन है, जिसका इस्तेमाल एम्स पहले ही कर चुका है। एम्स के अध्यक्ष जमीन न होने की वजह से सुपर स्पेशियलिटी सेवा का विस्तार नहीं हो पा रहा है। बजट की कोई दिक्कत नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा
एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री, डॉ. हेमंत कुमार ने कहा, जमीन न मिलने की वजह से 200 बेड के सुपर स्पेशियलिटी सेवा का विस्तार नहीं हो पा रहा है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से बातचीत की जा रही है। एम्स गोरखपुर अन्य एम्स की तुलना में काफी छोटा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह एम्स शहर में है। इस संबंध में 20 दिन पहले ही पटना में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक हो चुकी है। उम्मीद है कि जल्द ही जमीन मिल जाएगी।


