धमनियों में रिसाव रोकने वाली क्लिप से अपेंडिक्स की सर्जरी, मिला कापीराइट
उपलब्धि -एम्स की तकनीक को भारत के साथ ही कनाडा से भी मिला कॉपीराइट -अपेंडिक्स

मनीष मिश्र गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के डॉक्टरों ने अपेंडिक्स की सर्जरी के लिए किफायती तकनीक विकसित की है। इसका अंतरराष्ट्रीय कॉपीराइट भी मिल गया है। इस तकनीक में खून की बारीक धमनियों में रिसाव रोकने वाली होमेलॉक क्लिप का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह परंपरागत धागा या लूप तकनीक की तुलना में न केवल सस्ती बल्कि ज्यादा सुरक्षित भी है। इस तकनीक को अंतराष्ट्रीय जर्नल पबमेड में प्रकाशित किया गया है। एम्स के डॉक्टरों ने दर्जनभर देशों के चिकित्सकों को इस तकनीक की ट्रेनिंग भी दी है。
तकनीक का विकास
एम्स के जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. मुकुल सिंह व एकेडमिक थर्ड ईयर जूनियर रेजिडेंट डॉ. दर्शन जायसवाल ने इसे विकसित किया है। इस तकनीक में धागे या लूप की जगह होमेलॉक क्लिप का प्रयोग किया जाता है। पारंपरिक तरीके में इस्तेमाल होने वाले धागे या लूप की लागत 1200 से 1500 रुपये के बीच है। नई तकनीक में लगने वाली क्लिप की कीमत मात्र 100 से 150 रुपये है यानि पुराने से लगभग 90 फीसदी सस्ती है।
रिसाव की समस्या
सूजन होने पर भी नहीं होता रिसाव
डॉ. मुकुल सिंह के मुताबिक, परंपरागत तकनीक से अपेंडिक्स की सर्जरी में कई चुनौतियां व खामियां थीं। सर्जरी के दौरान कुछ मरीजों की आंतों में सूजन जो जाती है। इससे धागे या लूप से लगाई गई गांठ कुछ दिनों बाद ढीली पड़ जाती है। इससे मरीज की आंत से रिसाव होने का खतरा बना रहता था। इन मरीजों की दोबारा सर्जरी करनी पड़ती है। होमेलॉक क्लिप की मजबूत पकड़ के कारण आंतों में सूजन कम होने पर भी रिसाव नहीं होता। एम्स में डॉ. मुकुल की निगरानी में डॉ. दर्शन ने शोध किया। इस दौरान अपेंडिक्स के 60 मरीजों पर इस तकनीक से सर्जरी की गई। यह सर्जरी 100 फीसदी प्रभावी पाई गई। किसी मरीज की दोबारा सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बाद संस्थान ने इस तकनीक को कॉपीराइट करा लिया। भारत के साथ कनाडा से भी इसे कॉपीराइट मिला है।
अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग
विदेशी डॉक्टरों को भी दी जा रही ट्रेनिंग
इस सफल तकनीक की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होने लगी है। डॉ. मुकुल सिंह ने हाल ही में मेक्सिको में आयोजित एक कार्यक्रम में नई तकनीक पर व्याख्यान दिया। वहां के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा समेत दर्जनभर देशों के चिकित्सकों को भी इस तकनीक की ट्रेनिंग दी है।
फायदा
कोट
यह तकनीक खास तौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। सस्ती और सुरक्षित होने के कारण इससे न केवल इलाज का खर्च कम होगा, बल्कि सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं का खतरा भी कम हो जाएगा।
डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स


