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देशकोरोना पर बोले AIIMS डायरेक्टर- 90 फीसदी मरीजों में खांसी-बुखार जैसे मामूली लक्षण, ऑक्सीजन की जरूरत नहीं

एएनआई,नई दिल्लीPublished By: Madan Tiwari
Sun, 25 Apr 2021 09:05 PM
कोरोना पर बोले AIIMS डायरेक्टर- 90 फीसदी मरीजों में खांसी-बुखार जैसे मामूली लक्षण, ऑक्सीजन की जरूरत नहीं

''कोविड-19 एक सामान्य संक्रमण है। 85 से 90 फीसदी संक्रमितों में खांसी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द जैसे मामूली लक्षण देखने को मिल रहे हैं। ऐसे मामलों में रेमडेसिविर जैसी दवाओं और ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती।'' एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने रविवार को देश के शीर्ष चिकित्सकों से कोविड-19 पर हुई चर्चा के दौरान यह बात कही। चर्चा में मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान, एम्स में मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. नवनीत विग और महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा डॉ. सुनील कुमार ने हिस्सा लिया। डॉ. गुलेरिया ने कहा, ''कोविड-19 को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। लोग डर के मारे रेमडेसिविर के इंजेक्शन इकट्ठे करने लगे हैं। इससे रेमडेसिविर और ऑक्सीजन सिलिंडर की जमाखोरी शुरू हो गई है। नतीजतन हम इस जीवनरक्षक दवा और ऑक्सीजन की किल्लत का सामना कर रहे हैं।''

एम्स के निदेशक ने स्पष्ट किया कि कोरोना संक्रमण एक सामान्य संक्रमण है। जिन लोगों को सर्दी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द और खांसी जैसे लक्षण सता रहे, वे सामान्य दवाएं लेकर और घरेलू उपाय व योग क्रियाएं आजमाकर भी खुद को सात से दस दिन में ठीक कर सकते हैं। उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन या ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने की जरूरत नहीं।’ गुलेरिया ने कहा कि 10 से 15 फीसदी मरीजों में संक्रमण गंभीर स्तर पर पहुंचता है। उन्हें रेमडेसिविर जैसी दवाओं, ऑक्सीजन या प्लाज्मा की आवश्यकता पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत से भी कम संक्रमितों को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आती है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कोविड-19 से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने का यह मतलब नहीं कि लोग अस्पताल भागें या मेडिकल ऑक्सीजन लेने लगें। गुलेरिया ने सलाह दी कि संक्रमण की पुष्टि के बाद स्थानीय डॉक्टर से संपर्क करें। सभी डॉक्टर कोविड प्रोटोकॉल से वाकिफ हैं और उसी के हिसाब से इलाज शुरू करेंगे। 90 फीसदी मरीजों को सही समय पर सही दवाएं मिलें तो वे घर पर ही स्वस्थ हो सकते हैं।

कोविड टीके के गंभीर साइडइफेक्ट नहीं : डीजीएचएस
कोरोना पर चर्चा में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (डीजीएचएस) डॉ. सुनील कुमार ने दोहराया कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन और टीकाकरण सार्स-कोव-2 वायरस की शृंखला तोड़ने का प्रमुख जरिया हैं। उन्होंने कहा, कोविड-19 टीकों को लेकर तरह-तरह की अफवाहें और भ्रम हैं। हालांकि, वह यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि वैक्सीन से किसी तरह के गंभीर साइडइफेक्ट नहीं उभरते।

'साल 2020 एक नया वायरस लेकर आया'
डॉ. कुमार ने कहा, ''साल 2020 एक नया वायरस लेकर आया, जिससे लड़ने के लिए हम तैयार नहीं थे। केंद्र सरकार ने अपना कर्तव्य बखूबी निभाते हुए जांच क्षमता बढ़ाई है। हमें अपनी सरकार पर भरोसा रखना चाहिए कि वह डॉक्टरों, संक्रामक रोग विशेषज्ञों और माइक्रोबायोलॉजी के जानकारों की ओर से दिए गए सुझावों के आधार पर ठोस कदम उठाएगी। अब लोगों की बारी है कि वे जिम्मेदार रुख अपनाते हुए कोविड-19 से संबंधित भ्रामक पोस्ट न साझा करें। साथ ही बड़ी संख्या में टीकाकरण के लिए आगे आते हुए वायरस की शृंखला तोड़ने में योगदान दें।''

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