एआई इस्तेमाल नहीं करने वाले डॉक्टर हो जाएंगे रेस से बाहर : डॉ. नवीन
एनेस्थीसिया के डॉक्टरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग सीखना चाहिए, अन्यथा वे रेस से बाहर हो जाएंगे। डॉ. नवीन मल्होत्रा ने सीएमई समारोह में यह बात कही। कार्यक्रम में सुरक्षित एनेस्थीसिया के लिए नई तकनीकों पर चर्चा की गई। 140 डॉक्टरों ने भाग लिया, जिनमें से 70 जमशेदपुर के थे।

एनेस्थीसिया के डॉक्टरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के लिए सीख लेनी चाहिए, नहीं तो ऐसे डॉक्टर रेस से बाहर हो जाएंगे। यह बात इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नवीन मल्होत्रा ने कही। वे जमशेदपुर में हीमोडायनामिक मॉनिटरिंग, एनेस्थीसिया में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन विषय पर बिष्टूपुर स्थित एक क्लब में आयोजित सीएमई (कंटीन्यूईंग मेडिकल एजुकेशन) में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि एनेस्थीसिया के डॉक्टरों को इस तरह की जानकारी मिले कि मरीज को सुरक्षित और उत्कृष्ट एनेस्थीसिया मिले। आयोजन अध्यक्ष डॉ. यूके सिंह, जमशेदपुर से आयोजन सचिव डॉ. उमेश प्रसाद, डॉ. अमलान स्वैन, डॉ एस नाग, डॉ. नीलम सिन्हा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में दर्द की नई तकनीक पर चर्चा की गई। लंबे समय के दर्ज, मांसपेशियों के दर्द पर दी जाने वाली दवाओं पर चर्चा हुई। इस अवसर पर देश भर से 140 डॉक्टर आए थे, जिसमें से करीब 70 लोग जमशेदपुर से ही थे।
नई तकनीक ज्यादा सुरक्षित
एम्स पटना के अध्यक्ष डॉ. उमेश भदानी ने बताया कि पहले बेहोश करने के लिए सिर्फ लिंग्रोस्कोप होता था, लेकिन अब बेहोश करने के लिए एआई, अल्ट्रासाउंड और वीडियो लिंग्रोस्कोप का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सीधे स्क्रीन पर दिखता है। नवीनतम तकनीक द्वारा खास प्रवास दवाएं देने में सुरक्षा की दृष्टि से नए आयाम से बेहतर तरीके से एनिस्थिसिया दे सकते हैं। बोकारो जनरल अस्पताल के डॉ. अभिजीत दाम ने जीवन के अंतिम समय को किस तरह सुखमय बनाया जा सकता है। डॉ. उमेश ने बताया कि रविवार को जेआरडी स्टेडियम में उपस्थित लोगों को जीवन रक्षक पांच उपाय बताए। सीपीआर कैसे दी जाती है। यदि कोई बेहोश हो जाए तो टांग ऊपर कर देना चाहिए, सांस की नली में खाना फंस जाए तो नाभी के ऊपर और सीने की हड्डी के ठीक नीचे बीच में दबाना चाहिए। बेहोश आदमी को बायां करवट में रखना चाहिए तथा हर घर में पांच तरह की दवा अवश्य रखनी चाहिए। जिसमें क्लोपिडोग्रिल, इको स्प्रिन, सॉर्बिट्रेट, एटोर्बा स्टेटिन शामिल हैं।


