कौशल के लिए एआई जरूरी, पर निर्भरता उचित नहीं
कौशल विकास के लिए एआई आवश्यक है, लेकिन इसकी अत्यधिक निर्भरता उचित नहीं है। लोहरदगा में आयोजित स्कूल संवाद में इस विषय पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि एआई बच्चों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है, परंतु इसकी अधिकता उनकी रचनात्मकता और सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

कौशल के लिए एआई जरूरी, पर निर्भरता उचित नहीं लोहरदगा से न्यूज मैटर फाइल संख्या दस--- 12 सितंबर
हिन्दुस्तान ओलंपियाड स्कूल संवाद, लोहरदगा
कौशल के लिए एआई जरूरी, पर निर्भरता उचित नहीं
लोहरदगा, संवाददाता। बदलते परिवेश के साथ आधुनिक और तकनीक को हमें अपनाना होगा। नयी तकनीक बच्चों के स्किल डेवलपमेंट में कारगर साबित होगी। एआई जैसी नई तकनीक से बच्चों के जुड़ने से उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा। डिजिटल एरा में पढ़ाई से लेकर हर सेक्टर में एआई तेजी से उभर रहा है। ऐसे में नयी तकनीक के प्रति स्कूलों में शिक्षक और छात्रों का रुझान बढ़ रहा है। लेकिन एआई पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की रचनात्मकता, संवेदनशीलता और स्वयं सोचने की क्षमता को प्रभावित हो सकती है। हालांकि एआई शिक्षा, संसाधन विकास और रोजगार के नए अवसरों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी भी है।
एआई और इसकी भूमिका
तमाम बातें हिन्दुस्तान ओलंपियाड के तत्वावधान में शनिवार को लोहरदगा न्यू रोड स्थित होटल रुद्राक्ष इन के बहुउद्देशीय हाल में आयोजित स्कूल संवाद चर्चा- परिचर्चा के दौरान उभर कर सामने आयीं।
इसमें लोहरदगा जिला के विभिन्न स्कूलों के निदेशक, प्राचार्य, एडमिनिस्ट्रेटर व को-ऑर्डिनेटरों ने संवाद कार्यक्रम में बेबाकी से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दुस्तान ओलंपियाड छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पिछले एक दशक के अधिक समय से सशक्त और बेजोड़ मंच प्रदान कर रहा है। इससे बच्चों को अपना करियर बनाने में काफी मदद मिल रहा है। बच्चों में शुरुआती तैयारी के प्रति जज्बा पैदा करने के लिए ओलंपियाड की बड़ी भूमिका है।
अभिभावकों की भूमिका
अभिभावकों को मोबाइल की खूबी व खामियों के प्रति अपने बच्चों को सचेत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कहा कि सिर्फ स्कूल पर इसे थोपने से काम नहीं चलेगा, बल्कि खुद अपने बच्चों में जागरूकता पैदा करनी होगी। एआई और मोबाइल बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। जो इसका नकारात्मक पहलू है। 16 से 18 वर्षतक के बच्चों से मोबाइल इस्तेमाल की आजादी पर प्रतिबंध होना चाहिए।
संजीव झा, प्रधानाचार्य शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर लोहरदगा।
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शहर के स्कूलों के निदेशक प्राचार्य व को-ऑर्डिनेटरों ने संवाद में रखे विचार:
एआई पढ़ाई के दौरान रचनात्मकता बढ़ाता है। यह न्यू टेक्नोलॉजी है। इसके जरिए जो बच्चे उत्तर लिखते हैं, उसकी क्वालिटी युक्त उत्तर नहीं होता है। आज बच्चे मोबाइल का पढ़ाई में इस्तेमाल करते हैं। इससे रचनात्मक क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। इसमें डिजिटल नॉलेज गैदरिंग और सोशल मीडिया भी शामिल है। इस पर पाबंदी की जरूरत है।
प्रतियोगी परीक्षाएं और आत्मविश्वास
--वीके बालान्जिनप्पा, डायरेक्टर, डिवाइन स्पार्क
एआई सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। अभिभावक बच्चों को पर्याप्त समय दें, बच्चों को टॉप कंपीटिटर बनाएं, ताकि वे किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें।
-- फा थॉमस पावाथिल, एडमिनिस्ट्रेटर लिवेंस अकादमी लोहरदगा।
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'हिन्दुस्तान ओलफ्यिाड' ने स्कूल टॉपर के साथ ही जिला टॉपर भी चुने जाएंगे। बच्चों को कई तरह के आकर्षक पुरस्कार मिलेंगे। कक्षा एक से 12वीं तक के बच्चे इसमें शामिल हो सकते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एआई की भूमिका बढ़ती जा रही है। इससे बच्चों में दक्षता क्षमता का विकास होगा। इसके उपयोग के प्रति बच्चों में जागरूकता लानी होगी।
---राजेश अग्रवाल, मां दमंवती सेंचुरियन फॉर एजुकेशन नर्चर स्कूल, लोहरदगा।
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एआई के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझना होगा। अभिभावकों को मोबाइल की खूबी व खामियों के प्रति अपने बच्चों को जागरुक करने की आवश्यकता है।
--- रिंकी मित्तल, प्रिंसिपल, लिटिल ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल लोहरदगा।
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हिन्दुस्तान ओलंपियाड से बच्चों में आता है आत्मविश्वास
हिन्दुस्तान ओलंपियाड प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। इससे आत्मविश्वास का विकास होता है। साथ ही विभिन्न विषयों में उनकी क्षमता का आकलन भी हो पाता है।
- विकास कुमार साहू, निदेशक, एसपी मुखर्जी सरस्वती शिशु मंदिर पतराटोली, लोहरदगा।
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हिन्दुस्तान ओलंपियाड बच्चों की बौद्धिक क्षमता को निखारने का मंच प्रदान कर रहा है। बेहतर टाइम मैनेजमेंट का होना बहुत जरूरी है, जिसे हिन्दुस्तान उपलब्ध करा रहा है।
-अब्दुश शमद, कोऑर्डिनेटर, बताह एकाडमी, लोहरदगा।
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एआई बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में काफी कारगर साबित हो सकता है बशर्ते गलत इस्तेमाल न हो। हिन्दुस्तान ओलंपियाड से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में काफी सहूलियत मिलेगी।
--श्याम सुंदर कुमार, कोऑर्डिनेटर, शीला अग्रवाल सविमं, लोहरदगा ।
तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमेशा घातक रही है। एआई का इस्तेमाल समझदारी से हो तो विद्यार्थियों के लिए यह मददगार है। अत्यधिक निर्भरता ज्ञान, कौशल, विवेक और व्यवहार सबको नुकसान पहुंचाकर कहीं पूरी पीढ़ी को अपना गुलाम न बना ले। सामाजिक विकास और भावनात्मक जुड़ाव को यह कमजोर कर सकता है।
मदन मोहन पांडेय, निदेशक, मंजूरमती हाई स्कूल
एआई जैसी नई तकनीक से बच्चों के जुड़ने से उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा। डिजिटल युग में पढ़ाई से लेकर हर क्षेत्र में एआई तेजी से उभर रहा है। लेकिन एआई पर अधिक निर्भर हो जाना ठीक नहीं है।
-निखिल कुमार, डायरेक्टर वाई-फाई स्टडी प्वाइंट
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एआई पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की स्वयं सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। मोबाइल व सोशल मीडिया का लत बच्चों के पढ़ाई पर असर डाल सकता है।
:-सितेश कुमार पाठक, एमबीडीएबी पब्लिक स्कूल, लोहरदगा।
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एआई पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की रचनात्मकता प्रभावित कर सकती है। छोटे बच्चों को अधिक देर मोबाइल देखना शिक्षा को प्रभावित कर रहा है।
-सि बसंती, प्रिंसिपल, उर्सुलाइन मिडिल स्कूल लोहरदगा।
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हिन्दुस्तान की इस पहल से बच्चों में पठन-पाठन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इसका रिजल्ट पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। इससे बच्चों का भविष्य संवर रहा है। बच्चों में सिलेबस के प्रति जागरूकता आयी है।
- रवीन्द्र नाथ कर्मकार, कोऑर्डिनेटर, सोलिटेयर एकेडमी लोहरदगा।
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जब किसी तकनीक का आविष्कार होता है तो उसके दोनों पक्ष सामने आते हैं। एआई और मोबाइल बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। जो इसका नकारात्मक पहलू है।
-मुकेश कुमार साहू, निदेशक, ब्लूमिंग बड स्कूल, लोहरदगा।
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नयी तकनीक बच्चों के स्किल डेवलपमेंट में कारगर साबित हो सकती है, लेकिन इसका उपयोग बच्चे कितना सकारात्मक कर रहे हैं ये महत्वपूर्ण बात है।
-मनीष कुमार साहू, निदेशक, गुरुकुल भारती लोहरदगा।
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हिंदुस्तान अख़बार,अभिभावक और शिक्षक मिलकर ही बच्चों को सही रास्ता दिखा सकते हैं। एआई के साथ-साथ संस्कार की भी जरूरत है। तभी बेहतर समाज में बच्चों की भागीदारी हो पाएगी।
-रोहित कुमार वर्मा, को-ऑर्डिनेटर, होलीफेथ पब्लिक स्कूल, कुडू।
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हिंदुस्तान ओलंपियाड बच्चों को प्लेटफार्म दे रहा है। बच्चों को, गलत लोगों से बचना चाहिए, हिंदुस्तान जैसे सही संस्था वालों की पहचान कर इंट्री देना चाहिए। बच्चों को प्रोत्साहित किया जाए। बच्चों को उनके काबिलियत से परिचित कराने का मंच, बच्चों को भी खुद जांचने का मौका हिंदुस्तान दे रहा है।
-मनोज कुमार, शिक्षक
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फोटो-15-शनिवार को लोहरदगा में हिंदुस्तान ओलंपियाड के तत्वावधान में आयोजित स्कूल संवाद कार्यक्रम में भाग लेते लोहरदगा जिला के शिक्षाविद, प्रिंसिपल, डायरेक्टर, एडमिनिस्ट्रेटर, कोऑर्डिनेटर व अन्य।
फोटो -16-संजीव झा, प्रधानाचार्य शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर लोहरदगा।
फोटो -17--वीके बालान्जिनप्पा, डायरेक्टर, डिवाइन स्पार्क
फोटो -18- फा थॉमस पावाथिल, एडमिनिस्ट्रेटर लिवेंस अकादमी लोहरदगा।
फोटो -19-राजेश अग्रवाल, मां दमंवती सेंचुरियन फॉर एजुकेशन नर्चर स्कूल, लोहरदगा।
फोटो -20-रिंकी मित्तल, प्रिंसिपल लिटिल ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल लोहरदगा
फोटो -21-विकास कुमार साहू, निदेशक, एसपी मुखर्जी सरस्वती शिशु मंदिर पतराटोली, लोहरदगा।
फोटो -22-अब्दुश शमद, कोऑर्डिनेटर, बताह एकाडमी, लोहरदगा
फोटो -23-श्याम सुंदर कुमार, कोऑर्डिनेटर, शीला अग्रवाल सविमं, लोहरदगा
फोटो-32- मदन मोहन पांडेय, डायरेक्टर, मंजूरमती हाई स्कूल
फोटो -24-निखिल कुमार, डायरेक्टर वाई-फाई स्टडी प्वाइंट
फोटो -25-:-सितेश कुमार पाठक, एमबीडीएबी पब्लिक स्कूल, लोहरदगा।
फोटो -26-सि बसंती, प्रिंसिपल, उर्सुलाइन मिडिल स्कूल लोहरदगा।
फोटो --27-रवीन्द्र नाथ कर्मकार, कोऑर्डिनेटर, सोलिटेयर एकेडमी लोहरदगा।
फोटो --28-मुकेश कुमार साहू, निदेशक, ब्लूमिंग बड स्कूल, लोहरदगा
फोटो --29-मनीष कुमार साहू, निदेशक, गुरुकुल भारती लोहरदगा
फोटो--30- रोहित कुमार वर्मा, कोऑर्डिनेटर, होलीफेथ पब्लिक स्कूल, कुडू
फोटो -31-मनोज कुमार, शिक्षक


