कानपुर किडनी कांड में आहूजा अस्पताल के डॉक्टर दंपति समेत चार को जमानत
कानपुर में चर्चित किडनी कांड में आरोपी आहूजा अस्पताल के डॉक्टर दंपति समेत चार लोगों को जमानत मिल गई है। जमानतें अलग-अलग तिथियों पर स्वीकृत हुई हैं। पुलिस ने आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

कानपुर, प्रमुख संवाददाता। चर्चित किडनी कांड में आरोपी आहूजा अस्पताल के डॉक्टर दंपति समेत चार लोगों को जमानत मिल गई। आहूजा दंपति को हाईकोर्ट से जमानत मिली है, जबकि अन्य दो अस्पताल संचालकों की जिला न्यायालय से जमानत स्वीकृत हुई है। चारों की जमानतें अलग-अलग तिथि पर स्वीकृत हुई हैं। कल्याणपुर पुलिस ने मार्च में आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का भंडाफोड़ किया था। कल्याणपुर के मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पुलिस ने 31 मार्च को छापा मारा था। यहां बिहार के मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को छात्र आयुष कुमार की किडनी लगाई गई थी। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद रिसीवर पारुल तोमर को कल्याणपुर के प्रिया अस्पताल में जबकि डोनर आयुष कुमार को मेडलाइफ हास्पिटल में भर्ती कराया गया था।
आरोपी डॉक्टर दंपति का जमानत मामला
इस मामले में कल्याणपुर पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, मेडलाइफ के संचालक राम प्रकाश व राजेश कुमार और दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसी मामले में आहूजा दंपति की ओर से जिला न्यायालय में जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि जमानत के पक्ष में तर्क दिया गया कि आरोपित दंपति ने किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया और न ही इनकी कोई भूमिका है। आरोपित दंपति न अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गैंग का हिस्सा हैं और न ही उन्होंने किसी तरह के इलाज में हिस्सा लिया है। दोनों 31 मार्च से जेल में हैं और कोई क्रिमिनल हिस्ट्री भी नहीं है। 27 जून को पुलिस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। उधर, मेड लाइफ हास्पिटल के संचालक राजेश कुमार और प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह की ओर से भी जिला न्यायालय में जमानत की अर्जी दी गई थी। दोनों की जमानत अर्जी पर अलग-अलग तिथियों पर सुनवाई हुई। राजेश कुमार के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि पुलिस प्रपत्रों में केवल राजेश कुमार का उल्लेख है। वह उनके मुवक्किल के लिए नहीं बल्कि उसी नाम के दूसरे आरोपी के लिए है। जिसका नाम विशेष रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट में दिया गया है। राजेश का नाम सहअभियुक्त शिवम अग्रवाल और कुलदीप के बयानों के आधार पर संलिप्त किया गया है। पुलिस अभिरक्षा में अभियुक्त के दिए बयान का कोई महत्व नहीं है। राजेश आहूजा अस्पताल का कर्मचारी नहीं था बल्कि दिल्ली में काम करने वाला ओटी टेक्नीशियन है। इसी तरह प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह की ओर से भी जिला न्यायालय में तर्क दिए गए। मामले में अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि जमानत अर्जी स्वीकृत हो गई है।
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ये लोग भी हैं आरोपी
इस मामले में दिल्ली के एक अस्पताल में ओटी मैनेजर राजेश कुमार और ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव के साथ ड्राइवर परवेज सैफी, रोहित को जेल भेजा गया था। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली सरेंडर कर जेल गया था जबकि अफजल समेत चार आरोपी अभी फरार हैं।


