खेतों में पहुंचे कृषि छात्र, अधिकारियों ने दिए नवाचार के मंत्र
पीपराकोठी में कृषि छात्रों ने किसानों के खेतों का भ्रमण किया। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और बागवानी के बारे में सीखा। अधिकारियों ने छात्रों को सुझाव दिए कि कृषि शिक्षा को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना आवश्यक है। इस भ्रमण से छात्रों को किसानों की समस्याओं के समाधान की व्यावहारिक जानकारी मिली।

पीपराकोठी, एक संवाददाता। कृषि शक्षिा को खेतों की वास्तविक परस्थितिियों से जोड़ने के उद्देश्य से रावे कार्यक्रम में शामिल कृषि छात्र-छात्राओं ने कृषि वज्ञिान केंद्र, पीपराकोठी के पहल वाले गांवों में प्रगतिशील किसानों के खेतों का भ्रमण किया। छात्रों ने किसानों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित खेती को करीब से समझा।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों का निरीक्षण
इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दल्लिी के कृषि प्रसार महानिदेशक डॉ. आर.के. सिंह एवं आईसीएआर अटारी, पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनबुरुल्लाह ने भी किसानों के खेतों का जायजा लिया और छात्रों से संवाद किया। अधिकारियों एवं कृषि छात्रों ने पाडौलिया में प्रगतिशील किसान एवं सेवानिवृत्त सैनिक राजेश कुमार तथा झखरा गांव के किसानों के खेतों का भ्रमण किया। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट, प्रत्यक्ष बीज बुवाई, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण तथा बागवानी आधारित खेती का अवलोकन किया।
छात्रों द्वारा उत्पादन एवं लागत का निरीक्षण
अमरूद एवं लीची के बागों का निरीक्षण करते हुए छात्रों ने उत्पादन, लागत, बाजार और कृषि तकनीकों से होने वाले लाभ की जानकारी किसानों से ली। दौरे के दौरान छात्रों ने कृषि से संबंधित विभन्नि मॉडलों एवं परियोजनाओं का भी प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने छात्रों के मॉडल का अवलोकन कर महत्वपूर्ण सुझाव दिए तथा कहा कि कृषि शक्षिा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर खेतों की वास्तविक परस्थितिियों से जोड़ना जरूरी है।
कृषि शिक्षा में व्यावहारिक समझ का महत्व
अधिकारियों ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे क्षेत्र भ्रमण से छात्रों को किसानों की वास्तविक समस्याओं और उनके समाधान की व्यावहारिक समझ मिलती है। भ्रमण के दौरान कृषि वज्ञिान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरवन्दि कुमार सिंह सहित अन्य वैज्ञानिक, कर्मी, किसान एवं कृषि छात्र मौजूद रहे।


