पेटरवार का कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों के लिए बना मददगार
पेटरवार में कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों से सिखा रहा है। 2004 में स्थापित, यह केंद्र किसानों को फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सुझाव देता है। यह केंद्र जिले के 9 प्रखंडों के किसानों के लिए मील का पत्थर बन चुका है।

पेटरवार। पेटरवार में स्थापित जिले का कृषि विज्ञान केंद्र, जिले के 9 प्रखंडों के किसानों के लिए एटीएम कार्ड है। किसान यहां से खेती के नए-नए आधुनिक गुर सीखकर और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर अपने फसलों का उत्पादन में इजाफा कर एक ओर जहां आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे है, वही दूसरी ओर अपने परिवार का बेहतर ढंग से लालन-पालन कर रहे है। एक तरह से पेटरवार का कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
बुंडू में स्थापित है कृषि विज्ञान केंद्र:
बोकारो जिले का एक मात्र कृषि विज्ञान केंद्र पेटरवार प्रखंड के बुंडू पंचायत में स्थापित है। पेटरवार का कृषि विज्ञान केंद्र 25 एकड़ भूभाग पर फैला हुआ है। इस केंद्र की स्थापना वर्ष 2004 में हुआ था और आज बोकारो जिले के 9 प्रखंडों के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस केंद्र से किसान कृषि कार्य के नए-नए गुर सीखकर अपनी फसलों का पैदावार बढ़ाने की दिशा में बेहतर कार्य कर रहे हैं।
9 प्रखंडों के किसानों को मिलता है प्रशिक्षण:
पेटरवार में स्थापित जिले का एकमात्र कृषि विज्ञान केंद्र जिले के 9 प्रखंड, गोमिया, पेटरवार, कसमार, जरीडीह, बेरमो, नावाडीह, चंद्रपुरा, चास और चंदन कियारी के किसानों को आधुनिक खेती करने का गुर सिखाया जाता है। किसान यहां से आधुनिक खेती करने का गुर सिख कर उसे अपने खेतों में प्रयोग कर रहे हैं और बेहतर परिणाम किसानों को मिल भी रहा है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची व झारखंड सरकार के सहयोग जिले के किसानों को कृषिकेंद्र से कृषि कार्य करने के नई विधियों, उत्तम बीजों की पहचान, मृदा जांच, विभिन्न फसलों में लगने वाले किट से बचाव, बाजार प्रबंधन, मौसम व जलवायु आदि की जानकारी व जरूरी वैज्ञानिक सुझाव दिए जाते हैं। इससे किसान अच्छी उत्पादन व आय में बढ़ोतरी करते हैं।
कृषि वैज्ञानिक केवल कृषि विज्ञान केंद्र में ही नही बल्कि सुदूरवर्ती गांवों में जाकर:
कृषि विज्ञान केंद्र के 25 एकड़ भूमि पर मौसम अनुरूप कृषि कार्य किये जाते है। केंद्र में खरीफ मौसम में धान,मडुआ और रवि मौसम में सरसों, मक्का और विभिन्न प्रकार के सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। अब तक वरीय वैज्ञानिक के रूप में दे चुके है सेवा: कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद से अब तक 6 वरीय वैज्ञानिक अपनी सेवा दे चुके है। 2004 में हुई कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद केंद्र में सबसे पहले डॉ राधाकांत ठाकुर,डॉ अशोक कुमार, डॉ उदय कुमार सिंह, डॉ अनिल कुमार, डॉ रंजय कुमार सिंह अपनी सेवा किसानों को दे चुके है। वर्तमान में डॉ सुषमा सरोज सुरीन किसानों के बीच जाकर अपना सुझाव किसानों के साथ साझा कर रही है, ताकि किसान बेहतर कृषि कार्य करके आत्मनिर्भर बन सके।


