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चीन से युद्ध के बाद रक्षा मंत्री के लिए चुनाव प्रचार करने उतर पड़े थे अभिनेता दिलीप कुमार; 1962 का किस्सा

दिलीप कुमार ने इस चुनाव के बारे मे अपनी आत्मकथा “द सब्सटांस एंड द शेडो” में लिखा था। यह किताब हिंदी और उर्दू में “वजूद और परछाई” नाम से प्रकाशित हुई है। इसमें उन्होंने चुनाव प्रचार का जिक्र किया था।

चीन से युद्ध के बाद रक्षा मंत्री के लिए चुनाव प्रचार करने उतर पड़े थे अभिनेता दिलीप कुमार; 1962 का किस्सा
Ankit Ojhaवार्ता,मुंबईMon, 20 May 2024 12:05 PM
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बॉलीवुड के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार ने वर्ष 1962 लोकसभा चुनाव के दौरान बॉम्बे सिटी नार्थ सीट से चुनाव लड़ रहे पूर्व रक्षा मंत्री वी.के.कृष्ण मेनन के लिये प्रचार किया था। वर्ष 1962 में तीसरे लोकसभा चुनाव के दौरान बॉम्बे सिटी नार्थ की लोकसभा सीट पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जिगरी दोस्त और देश के तत्कालीन रक्षा मंत्रीवी.के. कृष्ण मेनन चुनाव लड़ रहे थे। उस दौर में रक्षा मंत्री मेनन को लेकर पूरे देश में गुस्से का माहौल था। चीन भारत की सीमा में घुसपैठ करने लगा था। मेनन चीन का मुकाबला करने में पूरी तरह से नाकाम हो रहे थे।

जेबी कृपलानी पहुंच गए चुनाव लड़ने
आचार्य जे.बी.कृपलानी , वी.के.मेनन के चुनाव लड़ने से बेहद नाराज़ हो गए। कृपलानी ने अपनी बिहार की सीतामढ़ी सीट छोड़कर बांबे सिटी नार्थ सीट से रक्षा मंत्री मेनन के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इसी दौरान एक अखबार ने कविता छापी,चीनी हमला होते हैं, मेनन साहब सोते हैं, सोना है तो सोने दो, कृपलानीजी को आने दो।

प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को शायद यह लगा कि कांग्रेस के वी.के. कृष्ण मेनन, जे.बी. कृपलानी को नहीं हरा पाएंगे। नेहरू ने उस समय फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार को प्रचार में उतार दिया। बांबे सिटी नार्थ लोक सभा सीट पर मेनन का पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी से सीधा मुकाबला था। वह चुनाव देश में काफी चर्चित हुआ था।

दिलीप कुमार ने इस चुनाव के बारे मे अपनी आत्मकथा “द सब्सटांस एंड द शेडो” में लिखा था। यह किताब हिंदी और उर्दू में “वजूद और परछाई” नाम से प्रकाशित हुई है। दिलीप कुमार ने लिखा था,मैंने पहली बार 1962 में लोक सभा चुनाव में किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मुझे खुद फोन करके कहा था कि 'क्या मैं समय निकाल कर बंबई में कांग्रेस ऑफिस में जाकर वी.के.कृष्ण मेनन से मिल सकता हूं? वे बांबे सिटी नार्थ से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ एक बड़े नेता जे.बी. कृपलानी लड़ रहे थे।मैंने पंडित जी की बात का सम्मान किया। क्योंकि आगा जी के बाद मैं सबसे ज्यादा आदर एवं सम्मान उन्हीं का करता था।जैसा कि पंडित जी ने कहा, मैं जुहू में कांग्रेस ऑफिस गया। मेनन ने दिलीप कुमार से कहा कि चुनावी मुकाबला कड़ा है। वे चाहते थे कि मैं फिल्म उद्योग के लोगों को चुनाव रैली में आने के लिए कहूं।

दिलीप कुमार ने लिखा था, मैंने सबसे बड़ी राजनीतिक सभा को मुंबई के कूपरेज मैदान में संबोधित किया। मुझे इसके बारे में बिल्कुल पता नहीं था कि मुझे भाषण देना है। मौके पर पहुंचते ही देखा कि लोग मेरा नाम ले रहे थे और शोर मचा रहे थे। मैं जब जनता के सामने आया, तो उनकी खुशी और जोश भरी चीख-पुकार और साफ सुनाई देने लगी। मैंने गहरी सांस ली और दस मिनट बोला। जब मेरा भाषण खत्म हुआ, तो तालियों की आवाज बहरा कर देने वाली थीं। इस तरह मैंने मेनन के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कई भाषण दिए।कांगेस के लिए चुनाव प्रचार करना मेरा एक नियमित काम बन गया, क्योंकि कृष्ण मेनन जीत गए थे। वर्ष 1962 में बांबे सिटी नार्थ पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व रक्षा मंत्री वी.के कृष्ण मेनन ने निर्दलीय प्रत्याशी आचार्य जे.बी.कृपालानी को एक लाख 45 हजार 358 मतों के अंतर से पराजित कर दिया था।