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6 अगस्त, 2020|3:43|IST

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चीन की सीनाजोरी, चोरी-छिपे घुसने के बाद गलवान को बता रहा है अपना

LaC (Symbolic Image)

15 जून की रात गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सेना की झड़प में चीन के 40 से ज्यादा जवान या तो घायल हुए या मारे गए। वहीं भारत के भी 20 जवान य शहीद हो गए। ऐसे में इतने के बाद भी चीन अपनी अकड़ से बाज नहीं आ रहा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि गालवान घाटी क्षेत्र की संप्रभुता हमेशा चीन से संबंधित रही है। उन्होंने कहा कि - चीनी पक्ष से, हम भारत के साथ और अधिक झड़पों को नहीं देखना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों और हमारी कमांडर स्तर की वार्ता की सर्वसम्मति के बाद भी भारतीय सैनिकों ने हमारी सीमा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। हम भारत से अपने सीमावर्ती सैनिकों को सख्ती से अनुशासित करने, उल्लंघन और उत्तेजक गतिविधि को रोकने के लिए बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने के लिए कहते रहे हैं। हम राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संचार कर रहे हैं। इसका सही और गलत होना बहुत स्पष्ट है । यह घटना एलएसी के चीनी पक्ष में हुई और इसके लिए चीन को दोष नहीं दिया जाए।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा निकट गलवान घाटी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। जानकारों के मुताबिक, इस इलाके में एलएसी पर कोई विवाद नहीं रहा है, लेकिन चीन अब यहां भी गतिरोध पैदा करने की साजिश कर रहा है। चीन को डर है कि इस इलाके में भारत की मजबूत पकड़ से तिब्बत तक उसके जाने वाले राजमार्ग को खतरा पहुंच सकता है। गलवान सेक्टर बेहद संवेदनशील है, क्योंकि एलएसी के नजदीक डीएस-डीबीओ रोड से जुड़ता है।

लेह से दौलत बेग ओल्डी तक भारत की सामरिक सड़क दारबुक-श्योक-दौलतबेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) गुजरती है। घाटी में भारत की सबसे अग्रिम गश्ती चौकी के तौर पर गलवान फ्लैश प्वाइंट पीपी 14 है, जिसके बेहद समीप चीनी सेना आ गई है। चीन आईटीबीपी पोस्ट से पीपी 14 तक सड़क निर्माण पर विरोध जता रहा है। इस सड़क के जरिये भारत अपनी सामरिक स्थिति को मजबूत करता है।

 

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  • Web Title:after the clash also china says The sovereignty of the Galwan valley area has always belonged to China