After tehcnical fault ahead of launching of Chandrayaan-2 the audience was disappointed - चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आखिरी समय में टला लेकिन ISRO की सक्रियता की हो रही है तारीफ DA Image
14 नबम्बर, 2019|2:31|IST

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चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आखिरी समय में टला लेकिन ISRO की सक्रियता की हो रही है तारीफ

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भारत ने सोमवार तड़के होने वाले चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को तकनीकी खामी की वजह से टाल दिया जिसके बाद यहां यह प्रक्षेपण देखने आए लोगों को निराशा रहे। रात एक बजकर 55 मिनट पर प्रक्षेपण रोकने की जानकारी दी गई। कई मिनट तक लोगों में उहापोह की स्थिति रही, जिसके बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इसकी पुष्टि कर दी।

इसरो के मुताबिक जीएसएलवी एमके जीएसएलवी मार्क तीन के लॉन्च सिस्टम में तकनीकी खामी देखे जाने के बाद इसे रद्द किया गया। देश का यह ऐतिहासिक क्षण देखने यहां लोग दूर-दूर से पहुंचे थे। वे लोग इसरो द्वारा हाल ही में बनाई दर्शक दीर्घा से सांसें थामे प्रक्षेपण का इंतजार कर रहे थे लेकिन जब घड़ी की सूई आगे नहीं बढ़ी और प्रक्षेपण टालने की घोषणा हुई तो उन्हें निराशा हाथ लगी। लेकिन, सक्रियता और सही समय पर फैसला लेने के लिए इसरो की जमकर तारीफ हो रही है। 

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान के प्रक्षेपण में सतर्कता बरतने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तारीफ की है। विभिन्न अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत के दूसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान -2 के प्रक्षेपण को समय रहते रद्द करने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी की तारीफ करनी चाहिए।
 

कोलकाता स्थित भारतीय वैज्ञानिक शिक्षा एवं अनुसंधन संस्थान के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन स्पेस साइंस के प्रमुख राजेश कुंबले नायक ने कहा, प्रक्षेपण प्रणाली के बारे में इसरो की सफलता दर असाधारण है। अंतिम मिनट तक एक रॉकेट में जटिल प्रणालियों की जांच करना और उनका निदान करना अपने आप में एक कला है, जिसमें उन्हें महारत हासिल है। नायक ने बताया, ‘मुझे खुशी है कि इसरो के लोगों ने जल्दबाजी कर एक बड़ी आपदा मोल लेने की बजाए इसके प्रक्षेपण को रद्द करने का फैसला किया। मुझे उम्मीद है कि इस मिशन का प्रक्षेपण कुछ ही हफ्ते में होगा जो असफल होने से बेहतर होगा। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि किसी भी तकनीकी समस्या को इसरो दूर करेगा और इसे सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया जाएगा।

 

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स्पेस वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी प्रक्षेपण स्थल पर मौजूद थे। कई वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कहा है कि प्रक्षेपण टलने से थोड़ी निराशा जरूर हुई है, लेकिन समय रहते तकनीकी खामी का पता चल जाना अच्छी बात है। उन्होंने प्रक्षेपण की नई तारीख की जल्द घोषणा होने की उम्मीद भी व्यक्त की है।
 

इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के पूर्व डायरेक्टर जी बालाचंद्रन ने कहा, ‘ये सामान्य है। अगर कोई गड़बड़ी है तो आप लॉन्चिंग नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मिशन की लागत 100 करोड़ रु है। ये एक साधारण या गंभीर बात भी हो सकती है, वे लोग (इसरो) इसका विश्लेषण करेंगे।’

इसरो ने अपने ‘बाहुबली’ रॉकेट में तकनीकी खामी का पता सोमवार तड़के प्रक्षेपण से एक घंटा पहले लगा लिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसरो की प्रशंसा करते हुए कहा है कि कभी नहीं से बेहतर ‘कुछ समय का विलंब होता है। आपको बता दें कि लॉन्चिंग की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। कुल 978 करोड़ रुपये की लागत वाले चंद्रयान-2 का उद्देश्य भारत को चंद्रमा की सतह पर उतरकर उसका अध्ययन करना है। 

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