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1 अप्रैल, 2020|8:56|IST

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एस जयशंकर के बाद अब नटवर सिंह ने कहा- हां, सरदार पटेल को पहली कैबिनेट में नहीं रखना चाहते थे जवाहर लाल नेहरू

क्या सरदार वल्लभभाई पटेल 1947 में जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट सूची में शामिल थे? इस सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह ने भी सहमति जताई है। आपको बता दें कि हाल ही में केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नारायणी बसु द्वारा लिखी उनके परदादा वीपी मेनन की ऑटोबायोग्राफी का हवाला देकर कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अपने कैबिनेट में सरदार बल्लबभाई पटेल को नहीं चाहते थे।

नटवर सिंह के संडे गार्जियन अखबार में छपे एक आर्टिकल में लिखा है कि जवाहरलाल नेहरू ने सरदार पटेल का नाम उन लोगों की सूची में शामिल नहीं किया, जिन्हें वह अपने मंत्रिमंडल का सदस्य बनाना चाहते थे। मैंने पहली बार इसके बारे में एच वी होडसन की किताब, द ग्रेट डिवाइड में पढ़ा था जो 1969 में प्रकाशित हुई थी। होडसन ने लिखा था कि पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद पहली कैबिनेट लिस्ट में सरदार पटेल का नाम नहीं रखा था (एक फुटनोट में वे कहते हैं, 'संभवतः यह श्री गांधी की सलाह पर हुआ')। इस लेख के साथ नेहरू के उस पत्र की प्रति भी है जिसमें उन्होंने मंत्रियों के नाम की सूची दी थी। 

पटेल के मंत्रिमंडल से बाहर होने की खबर सुनकर वी पी मेनन ने वायसराय के पास जाकर उन्हें चेतावनी दी कि कांग्रेस में उत्तराधिकार की लड़ाई शुरू होगी और देश को विभाजित करेगी। जनता पर नेहरू का बहुत प्रभाव था लेकिन पार्टी के कोषाध्यक्ष और समिति के अध्यक्ष पटेल थे, जो संसदीय उम्मीदवारों का चयन करते थे।

क्या कहा था जयशंकर ने
जयशंकर ने एक वरिष्ठ नौकरशाह वी पी मेनन की जीवनी के अनावरण से संबंधित एक पोस्ट की थी। मेनन ने पटेल के बेहद करीब रहकर काम किया था। इस किताब को नारायणी बसु ने लिखा है। जयशंकर ने कहा कि किताब ने “सच्चे ऐतिहासिक व्यक्तित्व के साथ बहुप्रतीक्षित न्याय किया है।” उन्होंने कहा, “किताब से पता चला कि नेहरू 1947 में अपने मंत्रिमंडल में पटेल को नहीं चाहते थे और उन्हें मंत्रिमंडल की पहली सूची से बाहर रखा था। निश्चित रूप से इस पर काफी बहस की गुंजाइश है। उल्लेखनीय है कि लेखक ने इस खुलासे पर अपना पक्ष रखा है।” जयशंकर के इस ट्वीट पर गुहा की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई, जिन्होंने कहा, “यह एक मिथक है, जिसे प्रोफेसर श्रीनाथ राघवन ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।”

गुहा और जयशंकर के बीच ट्वीट पर हुई थी जंग

गुहा ने तीखे लहजे में लिखे गए ट्वीट में कहा, “आधुनिक भारत के निर्माताओं के बारे में फर्जी खबरों, और उनके बीच झूठी प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा देना, विदेश मंत्री का काम नहीं है। उन्हें इसे भाजपा के आईटी सेल पर छोड़ देना चाहिए।” इसके जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ विदेश मंत्री किताबें पढ़ते हैं और कुछ प्रोफेसरों के लिए भी ये एक अच्छी आदत हो सकती है। उन्होंने कहा, “ऐसे में मैं चाहूंगा कि मेरे द्वारा कल जारी हुई किताब जरूर पढ़नी चाहिए।” हालांकि ये ट्विटर बहस यहीं नहीं खत्म हुई। गुहा ने एक अगस्त 1947 को नेहरू द्वारा पटेल को लिखा गया एक पत्र पोस्ट किया।

इस पत्र में नेहरू ने आजाद भारत के अपने पहले मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए पटेल को आमंत्रित किया है, और पत्र में नेहरू ने पटेल को अपने मंत्रिमंडल का “सबसे मजबूत स्तंभ” बताया है। गुहा ने ट्विटर पर पूछा, “कृपया, क्या कोई इसे जयशंकर को दिखा सकता है।” गुहा ने जयशंकर से ट्विटर पर कहा, “सर, चूंकि आपने जेएनयू से पीएचडी की है तो आपने जरूर मुझसे अधिक किताबें पढ़ी होंगी।” उन्होंने आगे लिखा, “उनमें नेहरू और पटेल के प्रकाशित पत्राचार भी रहे होंगे, जो बताते हैं कि नेहरू किस तरह पटेल को एक मज़बूत स्तंभ के तौर पर अपने पहले मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते थे। उन किताबों को दोबारा पढ़िए।” वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शशि थरूर और जयराम रमेश ने भी इस बयान के चलते जयशंकर को आड़े हाथों लिया।

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  • Web Title:After S Jaishankar now Natwar Singh said Yes Jawaharlal Nehru did not want to keep Sardar Patel in the cabinet