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सबकी थी सहमति... विपक्ष के कृषि कानून वापसी पर चर्चा न करने के आरोपों पर बोले तोमर

हिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीGaurav Kala
Mon, 29 Nov 2021 10:00 PM
सबकी थी सहमति... विपक्ष के कृषि कानून वापसी पर चर्चा न करने के आरोपों पर बोले तोमर

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शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के बीच कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिना चर्चा के विधेयक पास किया गया। उधर, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जब सरकार ने विधेयक पास किया था तो विपक्ष कृषि कानून के खिलाफ था। इसलिए इस बार चर्चा की जरुरत नहीं पड़ी। हालांकि तोमर ने अफसोस जताया कि सरकार कृषि कानूनों के लाभों की व्याख्या करने में विफल रही, क्योंकि कृषि सुधार किसानों की भलाई के लिए लाए गए थे। 

कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 को संसद ने विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बीच पारित किया क्योंकि विपक्ष विधेयकों पर चर्चा चाहता था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन के पटल पर कृषि कानूनों पर चर्चा नहीं करने के लिए सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विधेयक का जल्दबाजी में पारित होना दर्शाता है कि सरकार "चर्चा से डरती है"। कहा कि जिस तरह से विधेयक पारित किया गया वह किसानों का अपमान था।

राहुल गांधी ने कहा, "जिस तरह से संसद में बिना चर्चा के उन्हें (कृषि कानूनों को) निरस्त किया गया, कोई बात नहीं हुई, इससे पता चलता है कि सरकार चर्चा से डरती है, सरकार जानती है कि उन्होंने गलत किया है। और यह कि सरकार डरी हुई है।"

उधर, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को पेश किए जाने के बाद एक विस्तृत चर्चा हुई थी और विपक्ष ने उस वक्त उन कानूनों को वापस लेने की मांग की थी। जब सत्ताधारी दल भी वापसी के लिए सहमत हो गया तो इस पर चर्चा की जरुरत ही क्या थी? तोमर ने कहा, "लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार आश्वासन दिया कि यदि सदस्य अपने निर्धारित स्थान पर बैठते हैं तो वह चर्चा के लिए तैयार हैं।" उन्होंने कहा कि अगर कोई चर्चा होती, तो वह निश्चित रूप से विपक्षी सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते।

भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले सात वर्षों में कई योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र की मदद करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार लागू किया गया था और एमएसपी पर फसलों की खरीद 2014 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है।

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