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बड़ा सवाल: सपा-बसपा एक दूसरे का कितना वोट करा पाएंगे ट्रांसफर

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लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) के लिए सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) पर फाइनल मोहर तो लग गई है, लेकिन इस गठजोड़ की सफलता बहुत कुछ वोट ट्रांसफर पर निर्भर करेगी। पिछले 25 साल से सपा और बसपा एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक अखाड़े और चुनाव में ताल ठोंकते आए हैं। दोनों के ही कार्यकर्ता और वोटर एक दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। नए समीकरण में 25 साल का माइंड सेट कितना बदलेगा इस पर सभी की नजर रहेगी।

लखनऊ में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल न करने की एक बड़ी वजह वोट ट्रांसफर को बताया। मायावती की यह चिंता वैसे ही नहीं है। जब भी दो दलों का चुनाव पूर्व गठबंधन हुआ है तो वोट ट्रांसफर से किसी को नुकसान तो किसी का फायदा होता है। यही कारण है कि गठबंधन बड़े हिसाब-किताब से किए जाते हैं। यही कारण है कि गठबंधन के अलीगढ़ और हाथरस के सपा और बसपा नेता एक तरफ खुश तो नजर आ रहे थे, लेकिन उनके जहन में एक सवाल यह भी बार-बार आ रहा था कि वोट ट्रांसफर किस हद तक सफल होगा। 

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इसके अलावा चुनावी नतीजों के बाद यह पार्टी के वोट बैंक को कितना प्रभावित करेगा। यह सभी जानता है कि राजनीति में न कोई दोस्त है और न दुश्मन। गठबंधन की उम्र को लेकर भी दोनों दलों के नेता ज्यादा कुछ बोलते नजर नहीं आए हैं। अलीगढ़ की यदि बात करे तो यहां यदि वोट ट्रांसफर कराने में दोनों दल सफल रहते हैं तो परिणामों पर गहरा असर डालेगा।

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सपा और बसपा के 1993 के गठबंधन में राम लहर के बावजूद अलीगढ़ की सात सीटों में से सिर्फ सपा ही गंगीरी विधानसभा में वीरेश यादव को विधानसभा पहुंचाने में कामयाब हुई थी, लेकिन अब हालात जुदा हैं। अब अगर दोनों दल अपने-अपने वोट शत प्रतिशत डायवर्ट करने में कामयाब होते हैं तो भाजपा की जीत की राह को मुश्किल बनाने ही नहीं बल्कि जीत हासिल करने में भी कामयाब हो जाएं तो कोई ताज्जुब नहीं होगा। 

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वैसे भी 2014 के बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी सपा ने कांग्रेस की साझीदारी में अलीगढ़, छर्रा, कोल और अतरौली जबकि बसपा ने अपने दम पर बरौली, खैर और इगलास में दूसरा पायदान हासिल किया। यानि इनके प्रत्याशी उपविजेता थे। 

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  • Web Title:after Mayawati and Akhilesh yadav alliance announcement how much SP-BSP vote can Transfer for each other