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27 जनवरी, 2020|6:46|IST

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केंद्र का अगला एजेंडा एनआरसी-जनसंख्या नियंत्रण, समान नागरिक संहिता पर भी निगाहें

pm modi and amit shah

मोदी सरकार-दो के पहले छह माह में पार्टी के एजेंडे के अहम हिस्सों पर अमल के बाद भी सरकार की तेजी अगले साल भी जारी रहेगी। अगले साल सरकार चार बड़े मुद्दों की तरफ बढ़ेगी। इनमें एनआरसी को देश भर में लागू करना, जनसंख्या नियंणत्र के लिए कानून की तैयारी, समान नागरिक संहिता के लिए जरूरी बदलाव व एक देश-एक चुनाव के लिए सहमति जुटाना शामिल है।

सत्रहवीं लोकसभा के अभी दो सत्र ही हुए हैं और सरकार ने अनुच्छेद-370 व तीन तलाक को समाप्त करने और नागरिकता संशोधन कानून के जरिए साफ कर दिया है कि वह दूसरे कार्यकाल में पहले से दो गुनी तेजी से काम करेगी। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ संसदीय कामकाज के भी नए रिकार्ड बनाए गए और दोनों सदनों में हंगामे में भारी कमी दर्ज की गई। लोकसभा में भारी बहुमत के साथ सरकार ने राज्यसभा में हर चुनौती के समय बहुमत हासिल कर साफ कर दिया है कि अल्पमत सिर्फ कागजों पर है, जब भी सदन में कोई मौका आएगा, बहुमत उसके साथ होगा।

सूत्रों के अनुसार, सरकार में विषम वित्तीय हालातों के बीच नए बजट की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, उसका अपना राजनीतिक एजेंडा इससे भी बड़ा है। सबसे पहले सरकार की कोशिश एनआरसी को देश के सभी राज्यों में लागू करना है। हालांकि, नागरिकता कानून के कारण इसका प्रतिकूल असर सामने आया है, लेकिन पार्टी का कहना है कि वह जल्द ही इस बारे में विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही सभी भ्रांतियों को दूर कर देगी।

प्रधानमंत्री दे चुके हैं जनसंख्या नियंत्रण के संकेत : सरकार के एजेंडे में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाना भी है। प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लालकिले से अपने संबोधन में इसके संकेत दे चुके हैं। उन्होंने कहा था छोटा परिवार-सुखी परिवार होता है और इस तरफ बढ़ना होगा। इसमें भी विरोध तो होगा, लेकिन देश की बहुसंख्यक भावनाओं के साथ वह इस पर आगे बढ़ेगी। यह भी भाजपा के अहम मुद्दों में शामिल रहा है।

समान नागरिक संहिता की तैयारी
भाजपा के एजेंडे में जनसंघ के समय से ही समान नागरिक संहिता बड़ा मुद्दा रहा है। अब संसद के दोनों सदनों के गणित में सरकार इस पर भी आगे बढ़ सकती है। हालांकि, इसमें कई संवैधानिक पेंच आ सकते हैं। विभिन्न धर्मों से जुड़े कानूनों में भी फेरबदल करना होगा। जब यह रास्ता साफ होगा, तभी सरकार इस पर आगे बढ़ सकती है। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा कि यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जब सरकार अनुच्छेद-370 पर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति दिखा चुकी है तो यह काम उससे ज्यादा मुश्किल नहीं है।

एक देश-एक चुनाव का भी बनेगा माहौल
सरकार के एजेंडे में एक और अहम मुद्दा एक देश एक चुनाव का है। पिछली सरकार के समय से ही यह कोशिशें शुरू हो गई थीं, लेकिन बीते एक साल में राज्यों के चुनाव में भाजपा को झटका लगने के बाद इस दिशा में कठिनाइयां बढ़ी हैं। भाजपा की सोच थी कि एक-दो साल में अधिकांश राज्यों में उसकी अपनी, गठबंधन की और मध्यममार्गी दलों की सरकारें होंगी, तब उसे इसपर आगे बढ़ने में आसानी होगी, लेकिन राज्यों के चुनाव से यह संभव नहीं हो पा रहा है। आने वाले समय में विभिन्न राज्यों के और कठिन चुनाव आने वाले हैं।

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