After 40 Years Single Judge Bench in Supreme Court - 40 साल बाद एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सिंगल जज बेंच DA Image

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40 साल बाद एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सिंगल जज बेंच

supreme court   ani tweet 20 sep  2019

उच्चतम न्यायालय ने लगभग 40 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट में एकल जज पीठ शुरू करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 में संशोधन कर इसका रास्ता साफ कर दिया। 

इन मामलों की सुनवाई होगी : शीर्ष अदालत में शुरू होने वाली एकल जज पीठें जमानत (सीआरपीसी की धारा 437, 438 और 439) के ऐसे मामलों में सुनवाई करेगी जिनमें सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान हो। यह पीठ मुकदमे एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित (सीआरपीसी की धारा 406 तथा सीपीसी की धारा 25) करने के मामले भी सुनेगी। साथ ही ऐसे मामले भी सुनेंगी जिन्हें मुख्य न्यायाधीश समय समय पर अधिसूचित करेंगे। 

एकल पीठ में था इंदिरा गांधी का मामला : एकल पीठ की शुरुआत दोबारा की गई है। इससे पूर्व 80 के दशक में शीर्ष अदालत में एकल पीठें हुआ करती थी। एकल पीठ में बैठे जज जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को स्टे किया था। हाईकोर्ट का यह फैसला राजनारायण के पक्ष में था, जिसमें हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के लोकसभा निर्वाचन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद ये एकल जज पीठें बंद कर दी गई और सुप्रीम कोर्ट खंडपीठों या दो से अधिक जजों की पीठ में बैठने लगा। एकल जज पीठें हाईकोर्ट में होती हैं जो आपराधिक मामले सुनती हैं। 

शक्तियों का प्रयोग : सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 145 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया। इसके नियम 1 और आर्डर छह में यह शर्त जोड़ी गई है कि एकल जज पीठ जमानत के मामलों में दायर विशेष अनुमति याचिकाएं, स्थानांतरण केस जिन्हें मुख्य न्यायाधीश सौंपेंगे, सुनवाई करेगी। 

संख्या सबसे ज्यादा : उच्चत्तम न्यायालय में जजों की संख्या 34 हो गई है। जो अब तक की सबसे ज्यादा है। इससे पहले उच्चत्तम न्यायालय में जजों की स्वीकृत संख्या 31 थी। जो अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। उच्चत्तम न्यायालय में कक्षों की संख्या भी 17 कर दी जाएगी। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के सीएलसी से 10 जज : सुप्रीम कोर्ट में 10 जज ऐसे हैं जो दिल्ली विवि के कैंपस लॉ सेंटर (सीएलसी) के विधि स्नातक हैं। इनमें मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, आरएफ नारीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता (1978), जस्टिस नवीन सिन्हा (1979), जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एसके कौल, रविंद्र भट्ट और हृषिकेश राय (1982), जस्टिस इंदु मल्होत्रा और संजीव खन्ना (1983) हैं। इससे पूर्व रिटायर हो गए जज जस्टिस मदन लोकुर, एके सीकरी प्रमुख थे।

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