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 दुनिया भर में 2020 के बाद जीवाश्म ईंधन की मांग घटने लगेगी

Fossil Fuels (Symbolic image)

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमते देश में सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। लेकिन जलवायु परिवर्तन पर एक हालिया शोंध की मानें तो विश्व में जीवाश्म ईधन के इस्तेमाल में 2020 के बाद कमी आनी शुरू हो जाएगी और संभव हो इसकी कच्चे तेल के लिए मारा-मारी ही नहीं हो। 

रिपोर्ट में इसकी मुख्य वजह नवीनीकृत स्रोतों से उत्पादित ऊर्जा के दाम में कमी आना और हरित ऊर्जा नीतियों को बढ़ावा दिया जाना बताया गया है। कार्बन ट्रैकर द्वारा जारी नई रिपोर्ट के अनुसार इस समय पूरी दुनिया नवीन ऊर्जा पर कार्य कर रही हैं। नई हरित तकनीकों को अपनाया जा रहा है। 

रिपोर्ट में कहा गया, सरकारों की नीतियां जीवाश्वम ईधन को हतोत्साहित करने की हैं। इसके बावजूद अभी तक जीवाश्म ईधन की मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लेकिन 2020 के बाद यह परिपाटी बदलने वाली है, क्योंकि सरकारों की नीतियों की वजह से अब निर्णायक स्थिति आ चुकी है। 

2025 तक खत्म हो जाएगी सब्सिडी

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों में 40 से भी अधिक देशों ने जीवाश्म ईधन पर सबसिडी खत्म कर दी है। विभिन्न समझौतों के तहत 2025 तक करीब-करीब सभी देश जीवाश्म ईधन पर सबसिडी खत्म कर देंगे। 

तत्कालिक नुकसान पर दूरगामी फायदे 

रिपोर्ट के अनुसार जीवाश्म ईधन के इस्तेमाल घटने के दूरगामी फायदे हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था को इसके तात्कालिक नुकसान यह हैं कि इस क्षेत्र में हुआ खरबों डॉलर का निवेश प्रभावित होगा। बता दें कि जीवाश्म ईधन की खोज और बुनियादी ढांचे पर 25 खरब डॉलर से भी अधिक का निवेश हुआ है। लेकिन इससे बचने के लिए  हरित अर्थव्यवस्था संबंधी निवेश पर विशेष ध्यान केंद्रीय की रिपोर्ट में जरूरत बताई गई है। 

हरित ऊर्जा की मांग बढ़ेगी  

वर्ष 2020 के बाद वैश्विक ऊर्जा की खपत में एक से डेढ़ फीसदी की बढ़ोतरी होगी। जबकि नवीन स्रोतों से ऊर्जा की मांग में 15-20 फीसदी की दर से बढ़ेगी। 

तेल आधारित अर्थव्यवस्थाएं डगमगाएंगी

जिन देशों में जीवश्म ईधन का उत्पादन किया जाता है, उनकी अर्थव्यवस्था आने वाले समय में बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अभी से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात देश तैयारियां कर रहे हैं।  

शहरों के लिए नए मौके 

एक अन्य  शोध में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए यदि विश्व के सभी नौ हजार शहर अपनी नीतियों में बदलाव करते हैं, तो यह मौतों को रोकने एवं नए रोजगार के सृजन के लिए नया मौका होगा। इससे पूरे विश्व में 2030 तक प्रदूषण के कारण होने वाले 13 लाख लोगों को रोका जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन की नीतियों के क्रियान्वयन के लिए शहरों में नए रोजगार सृजित होंगे। इससे प्रतिवर्ष 1.4 करोड़ लोगों को नए रोजगार भी मिल सकते हैं। न्यू क्लाईमेट इंस्टीट्यूट के अध्ययन के मुताबिक ग्रीन हाउस गैसो के उत्सर्जन में शहरों की हिस्सेदारी 73 फीसदी है। इसलिए शहरों के लिए बनने वाली कार्ययोजनाएं महत्वपूर्ण हैं।

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  • Web Title:after 2020 fossil fuel demand will decrease Worldwide