रेशम कीट पालन से खुशहाल हो रहे किसान-डा सिन्धु
लोहरदगा में 'मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0' योजना के तहत एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां वैज्ञानिकों ने मलवरी रेशम कीटपालन के लिए नई तकनीकों की जानकारी दी। किसान उन्नत तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे रेशम व्यवसाय का विकास हो रहा है। यह कार्यक्रम किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

लोहरदगा, प्रतिनिधि।मलवरी रेशम कीटपालन में वैज्ञानिक तकनीक, रोग नियंत्रण एवं उत्पादन में वृद्धि को लेकर मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 के तहत लोहरदगा भंडरा प्रखंड के नवडीहा एवं सेन्हा प्रखंड के तिसरी अम्बारोली में वैज्ञानिक-किसान संवाद का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम में केन्द्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डा सिन्धु चिन्दी, अनुसंधान सह प्रसार केन्द्र के वैज्ञानिक पूर्णचन्द्र पाणिग्रही एवं अग्र परियोजना केन्द्र, नेतरहाट के तकनीकी कर्मियों के द्वारा कृषकों को उन्नत तकनीक की जानकारी दी गई। मलवरी कीट के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया।कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि लोहरदगा-लातेहार क्षेत्र में रेशम कीट पालन से लगातार नए किसान जुड़ रहे हैं।
वर्तमान में रेशम का व्यवसाय अपने सबसे अच्छी स्थिति में है। लोगों में बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं का साथ पाकर वो किसान भी इन्हें आसानी से कर पा रहे हैं, जो किसान पारंपरिक खेती में सफलता अर्जित नहीं कर पा रहे थे। सेरीकल्चर किसानों की तरक्की और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।कृषकों ने कीटपालन के क्रम में होने वाली परेशानियों को साझा किया, जिसका मौके पर समाधान बताया गया। कार्यक्रम में रेशम विभाग के कई अधिकारी और कर्मी मौजूद थे।


