मेस घोटाले के बाद डॉक्टरों को प्रशासनिक जिम्मेदारी से इंकार पड़ेगा भारी, प्राचार्य ने दी ये चेतावनी
दून मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पीछे हटने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी। प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कहा कि ऐसा करना अनुशासनहीनता है। मेस फीस घोटाले के बाद कई डॉक्टरों ने इस्तीफे दिए हैं। सभी विभागाध्यक्षों की बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी।
दून मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पीछे हटने वाले डॉक्टरों पर अब कार्रवाई की जाएगी। मेस फीस घोटाले के बाद मुख्य वार्डन समेत विभिन्न प्रशासनिक पदों से लगातार दिए जा रहे इस्तीफों को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने डॉक्टरों को दो टूक संदेश दिया है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सेवा का अभिन्न हिस्सा हैं और इनसे इंकार करना अनुशासनहीनता माना जाएगा। हाल ही में मेस फीस घोटाले के बाद मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद सत्यवली को पुरुष हॉस्टल का मुख्य वार्डन बनाया गया था, लेकिन उन्होंने कार्यभार अधिक होने का हवाला देते हुए चार पृष्ठ का इस्तीफा सौंप दिया।
इसके बाद एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव चोपड़ा ने भी मुख्य वार्डन पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले पीडियाट्रिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार भी एंटी रैगिंग सेल की जिम्मेदारी छोड़ चुके हैं।मेस घोटाले के बाद निदेशक स्तर से महिला और पुरुष हॉस्टल के मुख्य वार्डन सहित सभी 12 वार्डनों को बदला गया था, लेकिन नए पदाधिकारियों के जिम्मेदारी लेने से इंकार करने के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। इस स्थिति पर प्राचार्य ने सभी संबंधित चिकित्सकों को तलब कर सख्त हिदायत दी है। जल्द ही सभी विभागाध्यक्षों की बैठक भी बुलाई जाएगी। डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट कहा कि चिकित्सकीय दायित्वों के साथ प्रशासनिक कार्य भी सेवा नियमों का हिस्सा हैं और जिम्मेदारी से बचने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


