शिक्षा व जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी पर राज्यपाल को ज्ञापन
एबीवीपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को लोक भवन में ज्ञापन सौंपा। परिषद ने जे

रांची। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के झारखंड प्रांत के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार कोप्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में लोकभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को ज्ञापन सौंपकर राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।
उच्च शिक्षा में समस्याएँ
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों की ओर से स्नातक सीटों में कटौती, कई विषयों व ग्रामीण क्षेत्रों में स्नातकोत्तर कक्षाओं का बंद होना और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समाप्ति से विशेषकर ग्रामीण, जनजातीय और छात्राओं के सामने उच्च शिक्षा का संकट खड़ा हो गया है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विषयों के केंद्रीकरण से विद्यार्थियों पर दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई करने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, सकल नामांकन अनुपात घटेगा, ड्रॉपआउट बढ़ेगा और स्थानीय कॉलेजों का शैक्षणिक महत्व कम होगा। परिषद ने बीबीए, बीसीए, बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को पुनः शुरू करने और बीएड सहित शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को स्ववित्तपोषित श्रेणी में रखकर फीस बढ़ाने के निर्णय को वापस लेने की मांग की।
जेपीएससी की परीक्षा में अनियमितताएँ
ज्ञापन में जेपीएस की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों पर भी सवाल उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार आयोग ने अपनी एसओपी का उल्लंघन करते हुए मुख्य परीक्षा के लिए निर्धारित 90 दिन का समय नहीं दिया और 103 रिक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार 1,545 की बजाय 2,200 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन कर लिया। मॉडल उत्तर कुंजी में चार बार संशोधन, एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों के चयन और सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना परिणाम जारी होने को परिषद ने संदिग्ध बताते हुए सीबीआई जांच और मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग की।
छात्र समस्याएँ और विश्वविद्यालय अधिनियम
प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 की धारा 77 में छात्रसंघ की स्वायत्तता सीमित करने, सीनेट, सिंडिकेट और वित्त समिति में छात्रों के कम प्रतिनिधित्व और रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा कार्य देख रही बाहरी एजेंसी एनसीएफएफ पर वित्तीय व प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी लगाए। साथ ही आशंका जाहिर की कि नई व्यवस्था से संथाली, मुंडारी, कुड़ुख, खड़िया, हो, नागपुरी, खोरठा, कुर्माली और पंचपरगनिया जैसी जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई प्रभावित होगी। परिषद ने सीट कटौती वापस लेने, पीजी शिक्षा का केंद्रीकरण समाप्त करने, छात्रवृत्ति का शीघ्र भुगतान और छात्रसंघ की पुरानी प्रभावी व्यवस्था बहाल करने की मांग की।


