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शराब घोटाला मामले में AAP को झटका, अरविंद केजरीवाल के बाद एक और गिरफ्तारी

ईडी ने शराब घोटाला मामले में गोवा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी का फंड मैनेज करने वाले चनप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। पहले भी उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है।

शराब घोटाला मामले में AAP को झटका, अरविंद केजरीवाल के बाद एक और गिरफ्तारी
Ankit Ojhaहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीTue, 16 Apr 2024 12:44 AM
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ईडी ने कथित शराब घोटाला मामले में 17वीं गिरफ्तारी की है। ईडी ने गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के फंड का प्रबंधन करने वाले चनप्रती सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने रिश्वत के पैसों का इस्तेमाल गोवा में चुनाव लड़ने के लिए किया था। 12 अप्रैल को ही सिंह को हिरासत में ले लिया गया था। शनिवार को उन्हें स्पेशल कोर्ट के सामने पेश किया गया। 

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मई 2023 में सीबीआई ने भी चनप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि चनप्रीत हवाला ऑपरेटर्स से पैसे इक्ठा करते थे और फिर एस गोवा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के लिए खर्च करते थे। एक अधिकारी ने कहा, चनप्रीत सर्वे वर्कर, असेंबली मैनेजर और अन्य आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों को कैश पेमेंट देते थे।

ईडी ने कोर्ट को बताया कि उसके पास इस बात के सबूत हैं कि दिल्ली के शराब घोटाले मामले के साजिशकर्ताओं के साथ चनप्रीत के संबंध हैं। उनमें विजनय नायर, राजेश जोशी और कुछ आम आदमी पार्टी के नेता शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि साउथ ग्रुप से आम आदमी पार्टी को 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली थी जिसका इस्तेमाल गोवा चुनाव में प्रचार के लिए किया गया। 

बता दें कि साउथ ग्रुप में वाईएसआर कांग्रेस सांसद मगुंता श्रीनिवासुलु रेड्डी और उनके बेटे राघव मगुंता, सारथ रेड्डी शामिल हैं। इसके अलावा तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता और दिल्ली के कारोबारी समीर महेंद्रु दिल्ली के 32 रिटेल लिकर जोन में से 9 के ओनर हैं। इस मामले में सीएम केजरीवाल और के कविता को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

दरअसल दिल्ली सरकार ने 2021-22 में शराब के कारोबार को पुनर्जीवित करने के लिए नई नीति लाई थी। इसके तहत दिल्ली में 32 जोन  बनाए गए थे जिनमें अधिकतम 27दुकानें खुलनी थीं। पूरी दिल्ली में कुल 849 शराब की दुकानें खोली जानी थीं। इन दुकानों को प्राइवेट किया जाता। इससे पहले दिल्ली में 60 फीसदी दुकानें सरकारी थीं। आरोप है कि लाइसेंस शुल्क बढ़ाकर शराब के बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।