परसौनी दरगाह पर सालाना उर्स आज, तैयारियां पूरी, गूंजेगा समरसता का संदेश
महराजगंज के ग्राम परसौनी में हजरत सैय्यद शाह फखरुद्दीन का 99वें सालाना उर्स की तैयारियां पूरी की गई हैं। इस उर्स में अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है। आयोजक सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रख रहे हैं। हजरत फखरुद्दीन की शिक्षाओं का मूल तत्व प्रेम और सेवा है, जो समाज में भाईचारे का संदेश फैलाता है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। मिठौरा ब्लाक के ग्राम परसौनी स्थित हजरत कुतुब-उल-औलिया हजरत सैय्यद शाह फखरुद्दीन अलैहिर्रहमा के 99वें सालाना उर्स की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार को आयोजित होने वाले इस उर्स में महराजगंज सहित आसपास के जनपदों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है। दरगाह कमेटी ने सभी श्रद्धालुओं से उर्स में शामिल होकर अमन, भाईचारे, प्रेम और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।
सूफी संत की शिक्षाएं
सूफी संत हजरत फखरुद्दीन अलैहिर्रहमा की शिक्षाओं का मूल आधार प्रेम, सेवा, करुणा और समरसता था। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि इंसान की पहचान उसके धर्म, जाति या मजहब से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्म, मानव सेवा और प्रेम से होती है। उन्होंने लोगों को नफरत छोड़कर आपसी सौहार्द, सहिष्णुता और भाईचारे के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि उनकी दरगाह पर हर धर्म और समुदाय के लोग समान श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं और समाज में एकता का संदेश लेकर लौटते हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था
दरगाह की सज्जादानशीन व्यवस्था संभाल रहे सैय्यद हफीजुद्दीन उर्फ परवेज बाबू ने बताया कि उर्स को लेकर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और श्रद्धालुओं की सुविधा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक समरसता और इंसानियत का पर्व है, जहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ दुआ करते हैं।
हजरत फखरुद्दीन का जीवन
1857 में जन्म, परसौनी बनी कर्मभूमि
हजरत सैय्यद शाह फखरुद्दीन अलैहिर्रहमा का जन्म वर्ष 1857 में प्रयागराज के झूंसी में हुआ था। कम आयु में ही उन्होंने धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त कर ली। सूफी विचारधारा से प्रेरित होकर वे मानव सेवा और लोककल्याण के लिए विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करते रहे। वर्ष 1915 में वे परसौनी पहुंचे और यहीं को अपनी कर्मभूमि बना लिया। वर्ष 1927 में उनका इंतकाल परसौनी में ही हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा के लिए अभेद्य घेरा, 17 थानों की पुलिस फोर्स रहेगी तैनात
99वें वार्षिक उर्स एवं मिलाद को सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 17 थानों की पुलिस फोर्स के साथ पीएसी, ट्रैफिक पुलिस और फायर ब्रिगेड की तैनाती की गई है। चौक एसओ मनीष पटेल ने बताया कि मेले की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 02 इंस्पेक्टर, 16 पुरुष उपनिरीक्षक, 05 महिला उपनिरीक्षक, 50 पुरुष दीवान एवं सिपाही तथा 15 महिला दीवान एवं सिपाही तैनात रहेंगे। इसके अलावा डेढ़ सेक्शन पीएसी, चार ट्रैफिक पुलिसकर्मी तथा एक फायर ब्रिगेड वाहन भी पूरे मेले के दौरान मुस्तैद रहेगा।


