आपसी सुलह-समझौते से 99 हजार का किया गया निस्तारण
उन्नाव में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ जिसमें लगभग 99 हजार मामलों का निस्तारण हुआ। इसमें मोटर दुर्घटना, वैवाहिक, बैंक रिकवरी और विद्युत के कई मामलों का समाधान किया गया। 52 दंपतियों ने आपसी मतभेद खत्म कर पुनर्मिलन किया।
उन्नाव, संवाददाता। जिले में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह के आधार पर करीब 99 हजार मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें मोटर दुर्घटना, वैवाहिक, बैंक रिकवरी, विद्युत और अन्य प्री-लिटिगेशन वाद शामिल रहे। कई मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता कराया गया, जबकि 52 दंपतियों ने आपसी मतभेद खत्म कर साथ रहने पर सहमति जताई। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कविता मिश्रा की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय के केंद्रीय हॉल में दीप प्रज्जवलित कर हुआ। इस दौरान उन्होंने अधिक से अधिक वादों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराने का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अनिल कुमार शुक्ला, नोडल अधिकारी राम राज, अपर जिला जज, न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रतींद्र प्रताप सिंह, महामंत्री आनंद कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय उन्नाव के सहायक प्रोफेसर गौरव भारतीय द्विवेदी, रौनक तिवारी, विधि छात्र-छात्राएं, पराविधिक स्वयंसेवक और प्राधिकरण के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
मामलों का निस्तारण
लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 128 वादों का निस्तारण कर 12 करोड़ 94 लाख 38 हजार 400 रुपये का प्रतिकर अवार्ड किया गया। वैवाहिक 85 और बैंक रिकवरी के 1093 वाद निस्तारित हुए। बैंक मामलों में 1 करोड़ 79 लाख 14 हजार 900 रुपये की अदायगी तय हुई। फाइनेंस कंपनियों के 481 मामलों में 3 लाख 21 हजार 658 रुपये की अदायगी तय की गई। परिवार न्यायालय ने 83 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया, जबकि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पांच वैवाहिक प्री-लिटिगेशन वाद निपटाए। विद्युत से संबंधित 35,551 प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निस्तारण हुआ। वैवाहिक मामलों में 52 जोड़ों ने सुलह के बाद पुनर्मिलन स्वीकार किया। उन्होंने एक-दूसरे को माला पहनाकर कानूनी लड़ाई समाप्त करने और साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। इस आयोजन में न्यायिक अधिकारियों और संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। इससे मामलों के पक्षकारों को बड़ी राहत मिली और उन्हें खर्च भी बचाने का अवसर मिला। कुल लगभग 99,078 वादों का निस्तारण हुआ.


