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Hindi News देश4 महीने में 75 माओवादी ढेर; अमित शाह के निर्देश पर BSF-पुलिस की बॉन्डिंग काम आई, कांकेर सबसे सफल ऑपरेशन

4 महीने में 75 माओवादी ढेर; अमित शाह के निर्देश पर BSF-पुलिस की बॉन्डिंग काम आई, कांकेर सबसे सफल ऑपरेशन

नक्सलियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सख्त कार्रवाई के निर्देश के महज चार महीने में बीएसएफ ने 75 माओवादियों को ढेर कर दिया है। पिछले दिनों कांकेर में भी बड़ी सफलता मिली है।

4 महीने में 75 माओवादी ढेर; अमित शाह के निर्देश पर BSF-पुलिस की बॉन्डिंग काम आई, कांकेर सबसे सफल ऑपरेशन
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 18 Apr 2024 12:04 PM
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नक्सलियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सख्त कार्रवाई के निर्देश के महज चार महीने में सुरक्षाबलों ने 75 माओवादियों को ढेर कर दिया है। इसमें सबसे बड़ी सफलता मंगलवार को मिली, जब कांकेर में एक ऑपरेशन के दौरान बीएसएफ ने 29 माओवादियों को मार गिराया। माओवादियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन बीएसएफ और लोकल पुलिस की बॉन्डिंग दिखाती है, जिसकी पटकथा इसी साल जनवरी महीने में लिखी गई जब छत्तीसगढ़ में एक सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान अमित शाह ने बीएसएफ समेत पुलिस अधिकारियों संग बैठक में तत्काल प्रभाव से माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम देने का निर्देश दिया था। शाह ने तीन साल के भीतर नक्सल प्रभावित इलाकों को भयमुक्त करने का टारगेट दिया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के महज चार महीने बाद, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने लोकल पुलिस की मदद से कई खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया है। नक्सलियों पर ऐक्शन आगे भी जारी है। जनवरी से अभी तक 75 माओवादियों को मार गिराया जा चुका है, इसमें मंगलवार को कांकेर में 29 माओवादियों का एनकाउंटर भी शामिल है। 

मारे गए माओवादियों में कुख्यात शंकर राव भी शामिल था, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है। प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन 1 की पूरी कंपनी को समाप्त कर दिया गया है। यह अब तक माओवादियों के खिलाफ किसी भी ऑपरेशन में सबसे बड़ी सफलता है।

कांकेर सबसे सफल ऑपरेशन क्यों?
कांकेर का ऑपरेशन सुरक्षा बलों के लिए इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि 20 घंटे पैदल और 4 घंटे की गोलीबारी के दौरान एक भी पुलिस या सुरक्षाबल की मौत नहीं हुई। ऑपरेशन के दौरान बीएसएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच बॉन्डिंग भी देखी गई। 

गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक शीर्ष अधिकारी ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया, छत्तीसगढ़ की स्थानीय पुलिस की मदद से सेना अब तक के उन जंगली इलाकों तक पहुंच रही है, जहां से वो अनजान थी। खुफिया सूचनाएं भी पहले की तुलना में अधिक बार आ रही हैं।