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पालघर में 2 दिन से बुजुर्ग मां को ढूंढ रहा था शख्स, पेड़ के नीचे दबी हुई मिली सड़ी हुई लाश

महाराष्ट्र के पालघर में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की पेड़ से दबकर मौत हो गई। 2 दिन से मां को तलाश रहे बेटे ने खुद आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और पुलिस पर कुछ ना करने का आरोप लगाया है।

पालघर में 2 दिन से बुजुर्ग मां को ढूंढ रहा था शख्स, पेड़ के नीचे दबी हुई मिली सड़ी हुई लाश
Jagritiलाइव हिंदुस्तान,महाराष्ट्रSat, 22 Jun 2024 12:29 PM
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महाराष्ट्र के पालघर में एक शख्स अपनी मां को 2 दिनों से ढूंढ रहा था। अपने पोते-पोतियों को स्कूल छोड़ने के लिए घर से निकली 70 वर्षीय मंजुला झा 48 घंटे से लापता थी। अपनी मां की तलाश कर रहे बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि वह खुद भी उनकी तलाश करने में जुटा हुआ था। उसने कई सीसीटीवी रिकॉर्डिंग देखीं और अंत में एक संभावित जगह की पहचान की। बीते बुधवार की सुबह गिरे एक बड़े इमली के पेड़ के नीचे अपनी मां की साड़ी को पहचानते ही वह रो पड़ा। उसका शव दो दिनों से वहां दबा हुआ था और बुरी तरह सड़ चुका था।

बेटे ने अधिकारियों पर शव को बरामद करने के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि 19 जून को अर्नाला पुलिस स्टेशन में  की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद, शव 48 घंटे से अधिक समय तक इमली के पेड़ के नीचे फंसा रहा। बाद में जब नगर निगम और पुलिस अधिकारियों समेत एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई, तो वे सभी मौके पर पहुंचे और उनकी बुरी तरह सड़ी-गली लाश बरामद की। शव को विरार के नजदीकी ग्रामीण अस्पताल भेजा गया, जहां उसका पोस्टमार्टम किया गया। 

हाल ही में विरार शिफ्ट हुआ था परिवार

आस पास के लोगों के मुताबिक मंजुला झा अपने दो बेटों और उनके परिवारों के साथ मुश्किल से एक हफ्ते पहले ही विरार शिफ्ट हुई थीं। इससे पहले वे दो दशकों से अधिक समय तक काशीमीरा में रहते थे। अर्नाला थाने के वरिष्ठ निरीक्षक विजय पाटिल ने बताया, "शुरुआती तलाशी अभियान के बाद उनके बेटे सुरेश झा ने अर्नाला थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। हम उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला।" गुरुवार को मंजुला के बेटों ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए थे।

बेटे नरेश के मुताबिक, "सीसीटीवी फुटेज में मेरी मां लौटती हुई दिख रही थीं। इमली के पेड़ के पास पहुंचने के बाद वह दिखाई नहीं दीं, इसलिए मुझे शक हुआ कि शायद वह पेड़ों के नीचे फंस गई होंगी।" बड़े बेटे सुरेश झा ने बताया, "मेरी मां हमारी ताकत थीं। मेरे पिता का निधन करीब 20 साल पहले हो गया था। वह सुबह टहलने जाती थीं और सुबह 7.30 बजे घर लौट आती थीं। लेकिन 19 जून को जब वह वापस नहीं आईं, तो हम चिंतित हो गए। शुरू में हमें किसी अनहोनी की आशंका नहीं थी, इसलिए मैं काम पर चला गया। हालांकि, जब मैंने सुना कि वह दोपहर तक भी घर नहीं लौटीं, तो मैं वापस लौट आया। हमने रेलवे स्टेशन पर भी घोषणा की थी कि अगर वह वहां है, तो उसे पता चल जाएगा, क्योंकि वह हमारे पुराने पड़ोसियों से मिलने के लिए काशीमीरा जाने की योजना बना रही थी।” 

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