देश के 51 गांवों का चीन (China) से सीधा कनेक्शन, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के एक-एक गांव भी शामिल
EXCLUSIVE: गलवान घाटी में संघर्ष के बाद एलएसी पर भारत-चीन के बीच तनाव जारी है। देश के लोग चाइनीज समानों के बायकाट के लिए सोशल मीडिया पर मुहीम छेड़ चुके हैं। चीन और वहां की कंपनियों को आर्थिक मोर्चे...

EXCLUSIVE: गलवान घाटी में संघर्ष के बाद एलएसी पर भारत-चीन के बीच तनाव जारी है। देश के लोग चाइनीज समानों के बायकाट के लिए सोशल मीडिया पर मुहीम छेड़ चुके हैं। चीन और वहां की कंपनियों को आर्थिक मोर्चे पर शिकस्त देने की कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। वहीं, ऐसी खबरों के बीच एक ताज्जुब करने वाली रोचक खबर ये है कि अपने देश में कुल 51 गांव और कस्बे ऐसे हैं, जिनका सीधा कनेक्शन चाइना से है।
दरअसल इन गांवों का चीन से नाता उनके नाम से है। देश भर में ऐसे 51 गांव ऐसे हैं, जिनके नाम के आगे चाइना (China) जुड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में तो एक गांव नाम ही चाइना है, लेकिन असली खबर ये है कि गलवान घाटी में शहीद कर्नल बी संतोष बाबू ने जिस आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर सेना में आए, उसी आंध्र प्रदेश में एक नहीं, दो नहीं, पूरे 49 गांवों और कस्बों के नाम से पहले चाइना (China) शब्द जुड़ा है। सबसे बड़ी बात चीन से सटे पूर्वोत्तर राज्यों में किसी भी गांव के नाम के आगे या पीछे चीन या चाइना नहीं जुड़ा है।
| राज्य | जिला | China गांव की संख्या |
| आंध्र प्रदेश | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | 6 |
| आंध्र प्रदेश | प्रकाशम | 9 |
| आंध्र प्रदेश | विशाखापत्तनम | 10 |
| आंध्र प्रदेश | कृष्णा | 7 |
| आंध्र प्रदेश | श्रीकाकुलम | 1 |
| आंध्र प्रदेश | गुंटुर | 4 |
| आंध्र प्रदेश | ईस्ट गोदावरी | 7 |
| आंध्र प्रदेश | खम्मम | 2 |
| आंध्र प्रदेश | चित्तूर | 1 |
| आंध्र प्रदेश | नालगोंडा | 1 |
| आंध्र प्रदेश | विजयनगरम | 1 |
| पश्चिम बंगाल | हुगली | 1 |
| उत्तर प्रदेश | कांशीराम नगर | 1 |
स्रोत: वीलिस्ट डॉट इन
बता दें चीन के जवानों से गलवान घाटी में शहीद हुए कर्नल बी संतोष बाबू आंध्र प्रदेश से अलग हुए राज्य तेलंगाना के रहने वाले थे। संतोष बाबू बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल से शिक्षा हासिल करके NDA और फिर IMA का रुख किया।
सबसे ज्यादा 10 गांव, विशाखापत्तनम जिले में
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में कुल 10 गांवों ने नाम के साथ चीन या चाइना शब्द सीधे तौर पर लगा है। जैसे, चीन सारदा या कहें चाइना सारदा, चीन कुरमम, चाइना या चीन कांतावरम, चाइना मदीना जैसे नाम के कुल 10 गांव हैं। वहीं कृष्णा जिले में 7, श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे में 6 और प्रकाशम में 7 गांवों के नाम के आगे चाइना लगा हुआ है।
कैसे-कैसे चाइना गांव
| गांव का नाम | जिला | राज्य |
| China Rabha | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Uppalam | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Jaggampeta | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Gorrigedda | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Sarada | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Kurmam | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Mukhi Puttu | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Kantavaram | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Madina | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Konela | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| China Mallapuram | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Barangi | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Sankarlapudi | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Mamidada | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Jaggampeta | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Addapalle | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Ramanayyapeta | पूर्वी गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| China Bandarupalle | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Gotlagunta | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Nagampalle | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Gopavaram | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Annaluru | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Kraka | श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोरे | आंध्र प्रदेश |
| China Irlapadu | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Dornala | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Manthanala | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Arutla | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Uyyalawada | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Cumbum | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Ravipadu | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Venkana Palem | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Obeneni Palle | प्रकासम | आंध्र प्रदेश |
| China Ogirala | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Modugapalle | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Kamanapudi | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Pandraka | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Yerukapadu | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Kallepalle | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Avutapalle | कृष्णा | आंध्र प्रदेश |
| China Agraharam | गुंटूर | आंध्र प्रदेश |
| China Kodamagundla | गुंटूर | आंध्र प्रदेश |
| China Palakaluru | गुंटूर | आंध्र प्रदेश |
| China Ravuru (R) | गुंटूर | आंध्र प्रदेश |
| China Midisileru (G) | खम्मम | आंध्र प्रदेश |
| China Midisileru (Z) | खम्मम | आंध्र प्रदेश |
| China Sirlam | श्रीकाकुलम | आंध्र प्रदेश |
| China Chamalapalle | विजयनगरम | आंध्र प्रदेश |
| China Thayyur | चित्तूर | आंध्र प्रदेश |
| China Laxma Puram | नालगोंडा | आंध्र प्रदेश |
| Nagla China | कांशीराम नगर | उत्तर प्रदेश |
| China | हुगली | पश्चिम बंगाल |
स्रोत: वीलिस्ट डॉट इन
देश में सिंगापुर नाम के भी 19 गांव: चाइना ही नहीं, देश में सिंगापुर नाम के भी 19 गांव हैं। इनमें से अकेले महाराष्ट्र में 6 हैं। वहीं आंध्र प्रदेश में भी इतने ही सिंगापुर हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गुजरात और ओडिशा में एक-एक गांव के नाम सिंगापुर हैं, जबकि असम दो गांवों के नाम से सिंगापुर जुड़ा हुआ है।
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लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


