किसान के बेटे समेत पांच युवाओं का जूनियर असिस्टेंट पद पर चयन
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जूनियर असिस्टेंट परीक्षा में पांच युवाओं ने सफलता हासिल की। इनमें किसान के बेटे, पंचायत सहायक और कमिश्नर के वाहन चालक के बेटे शामिल हैं। इनकी उपलब्धियों ने परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल बना दिया है।

बस्ती, हिन्दुस्तान टीम। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जूनियर असिस्टेंट परीक्षा में जिले के अलग-अलग गांवों के पांच युवाओं ने सफलता हासिल कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इनमें किसान के बेटे, पंचायत सहायक और कमिश्नर के वाहन चालक के बेटे भी शामिल हैं। चयन की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में खुशी का माहौल है। केवाड़ी निवासी किसान राधेरमण यादव के पुत्र इंद्रजीत यादव ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। उन्होंने रामदास उदय प्रताप औद्योगिक इंटर कॉलेज, भटपुरवा चिलमा से हाईस्कूल और चौधरी चरण सिंह पब्लिक इंटर कॉलेज, पदमापुर से इंटर की पढ़ाई की। इसके बाद प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इंद्रजीत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया।
सफल युवाओं के नाम
ऊंजी निवासी विमल अग्रहरि भी जूनियर असिस्टेंट पद पर चयनित हुए हैं। उन्होंने जनता इंटर कॉलेज पोखरा से 10वीं और यूनिक साइंस एकेडमी, बस्ती से 12वीं की शिक्षा प्राप्त की। विमल की सफलता से पिता पप्पू अग्रहरि, रघ्घू, सनी काफी खुश है।
अन्य सफलताएँ
दुबौलिया क्षेत्र के ऊंजी मुस्तहकम निवासी अनिल सिंह के पुत्र ऋषभ सिंह ने जूनियर असिस्टेंट परीक्षा में सफलता हासिल की है। उनकी उपलब्धि से परिवार में खुशी है। इसी क्रम में दुबौलिया के अवधूपनगर निवासी तुलसीराम यादव की बेटी अंकिता यादव ने नौकरी के साथ घर से तैयारी कर सफलता हासिल की। अंकिता भरुकहवा में पंचायत सहायक के पद पर तैनात थीं। उन्होंने बिना कोचिंग के घर से तैयारी जारी रखी। जयप्रभा इंटर कॉलेज, भिउरा से 10वीं और अन्नपूर्णा इंटर कॉलेज, गोविन्दपारा से 12वीं की पढ़ाई की। उनकी सफलता से क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिली है। दुबौलिया विकास क्षेत्र के घोसियापुर निवासी संदीप चौधरी ने भी जूनियर असिस्टेंट पद पर चयन हासिल किया है। उनके पिता फूलचन्द्र चौधरी कमिश्नर के वाहन चालक हैं। संदीप ने रामआसरे इंटर कॉलेज, तिघरा से 10वीं और सावित्री विद्या विहार से 12वीं की शिक्षा प्राप्त की। संदीप ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया।


