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25 जनवरी, 2020|8:56|IST

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खुलासा: हाईवे पर गाड़ी चलाने वाले 30 फीसदी चालकों की आंखें कमजोर

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नेशनल हाईवे पर चल रहे करीब 30 प्रतिशत वाहन चालकों की आंखें कमजोर हैं। इसका खुलासा एनएचएआई की एक सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक देश के 30 फीसदी ड्राइवर ऐसे हैं, जिन्हें दूर का कम दिखाई देता है। ड्राइवरों को इस बात की जानकारी इसलिए नहीं है, क्योंकि उन्होंने कभी अपनी आंखों की जांच ही नहीं कराई है। ये नतीजे पिछले दो माह की जांच के बाद सामने आए हैं।

13 हजार ड्राइवरों की जांच की गई 
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पूरे देश में टोल प्लाजा और हाईवे पर पड़ने वाले ढाबों के आसपास कैंप लगाकर ड्राइवरों की आंखों की जांच कराई। इन कैंपों में करीब 13 हजार कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों की आंखों की जांच की गई। इनमें से करीब 3900 ड्राइवरों की आंखें कमजोर पाई गईं। 

नेत्र शिविर लगने आरंभ
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि वाहन चालकों को जागरूक करने के नेत्र कैंप लगने आरंभ हो गए हैं। औरेया, आगरा तथा अन्य जगहों टोल प्लाजा पर नेत्र जांच शिविर लगाए भी जा चुके हैं। इसी तरह के कैंप लखनऊ समेत अन्य जगहों पर भी लगाए जाने हैं। 

लाइसेंस नवीनीकरण की शर्त
रोड सेफ्टी कांग्रेस की गाइड लाइन के मुताबिक वाहन चालकों की आंखों की जांच रिपोर्ट सही पाये जाने पर ही ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाये। इसके बावजूद संबंधित विभागअधिकतर ड्राइवरों के लाइसेंस बना देते हैं। 

हादसों के पीछे का कारण 
एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक रात और दिन में होने वाले सड़क हादसों के पीछे वाहन चालकों की फिटनेस न होना भी एक कारण है। दिन में नौ मीटर और रात में पांच मीटर दूरी का रास्ता वाहन चालक को दिखाई न देने से अधिकांश हादसे होते हैं। ब्लैक स्पॉट की रिपोर्ट में बताया गया है कि रात में चौराहों पर होने वाले हादसों की वजह चालकों को स्पष्ट दिखाई न देना है। 

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  • Web Title:30 percent drivers having low eye sight who drive vehicle on national high way