भारतीय ज्ञान परंपरा की बहुलता और संवादधर्मिता पर जोर
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में ‘21वीं सदी में भारतीय ज्ञान प्रणाली’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. मनीन्द्र नाथ ठाकुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की विविधता और संवादधर्मिता पर चर्चा की। उन्होंने ज्ञान के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों को सूचना से परे देखने की सलाह दी। कार्यक्रम में कई शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

रांची, विशेष संवाददाता। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में प्रवाह- विचारों का प्रवाह, संवाद की धारा और दृष्टिकोणों का संगम, व्याख्यान शृंखला के तहत शनिवार को ‘21वीं सदी में भारतीय ज्ञान प्रणाली: बौद्धिक परंपराओं पर रचनात्मक संवाद’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के राजनीति अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर डॉ मनीन्द्र नाथ ठाकुर मुख्य वक्ता थे। अध्यक्षता कुलपति प्रो राजीव मनोहर ने की। प्रो ठाकुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता, विविधता और संवादधर्मिता पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं रही है। इसका विकास विभिन्न बौद्धिक, दार्शनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के निरंतर संवाद और सह-अस्तित्व से हुआ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा को नए दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से ज्ञान को महज सूचना के रूप में न देखने की अपील की। उनके अनुसार ज्ञान निरंतर प्रश्न करने, संवाद स्थापित करने और चिंतन की प्रक्रिया है। भारतीय ज्ञान प्रणाली की वास्तविक शक्ति उसकी बहुलता, सहिष्णुता और विभिन्न विचार परंपराओं के बीच अंतर्संबंध में निहित है।व्याख्यान के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिकता और समकालीन बौद्धिक विमर्श के संबंधों पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मुख्य वक्ता से सवाल पूछे। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सदस्य डॉ अभय कृष्ण सिंह ने व्याख्यान शृंखला की अकादमिक उपयोगिता पर चर्चा की। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ शुचि संतोष बरवार, डॉ रीना नंद, डॉ. शमा सोनाली, डॉ मनीषा शाहदेव, डॉ बीके सिन्हा, डॉ खुर्शीद अख्तर, डॉ शालिनी लाल, डॉ गीतांजलि सिंह सहित अन्य शिक्षकों व 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।


