इस बार लोकरंग महोत्सव में देश-विदेश के लोक कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
कुशीनगर में 20वें लोकरंग सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन 10 और 11 अप्रैल, 2027 को होगा। इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों और देशों के लोक परंपराओं, संगीत, और नृत्य की प्रस्तुतियाँ होंगी, जिसका मुख्य उद्देश्य लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करना है।

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए पिछले दो दशकों से लगातार सक्रिय लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि 20वें लोकरंग 2027 का आयेाजन आगामी 10 और 11 अप्रैल, 2027 को होगा।
आयोजन का विवरण
आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं साहित्यकार सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस बार के लोकरंग में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की विविधता देखने को मिलेगी। विभिन्न राज्यों की लोक कलाकार टीमें अपनी-अपनी क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुतियां देंगी। इसके साथ ही विदेशों से आने वाले कलाकार भी अपने-अपने देशों की लोक संस्कृति से दर्शकों का परिचय कराएंगे। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक स्मृति, जीवनानुभव और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकरंग का प्रयास ऐसी लोक परंपोराओं और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना है, जिन्हें मुख्यधारा के बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता।
समर्पण और उद्देश्य
लोकरंग की स्थापना और इसकी निरंतर यात्रा का उद्देश्य लोक संस्कृति को बाजारू प्रदर्शन और फूहड़पन से अलग रखते हुए उसकी मौलिकता, विविधता और सामाजिक सरोकारों को सामने लाना रहा है। पिछले वर्षों में देश के अनेक राज्यों के लोक कलाकार, लेखक, संस्कृतिकर्मी, विश्वविद्यालयों के शिक्षक और साहित्यकार इस आयोजन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि बीस वर्ष की यह यात्रा केवल एक सांस्कृतिक आयोजन की यात्रा नहीं है, इस विश्वास की यात्रा है कि गांवों में भी गंभीर, सार्थक और जनपक्षधर सांस्कृतिक आयोजन संभव हैं। लोकरंग के माध्यम से नई पीढ़ी को विलुप्त होती लोक कलाओं और लोक संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास लगातार जारी है।


