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20 साल पहले बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए थे, अब CAA के तहत मिली भारत की नागरिकता

गेन के पास पहले से ही अपना वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड था, लेकिन पासपोर्ट और इमिग्रेशन केंद्रों पर ये कागजात पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने कहा, "हमें पासपोर्ट कार्यालय में अपमान का सामना करना पड़ा।

20 साल पहले बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए थे, अब CAA के तहत मिली भारत की नागरिकता
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Fri, 31 May 2024 08:32 AM
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37 साल के देबीप्रसाद गेन अब भारत के नागरिक बन चुके हैं। वे करीब 20 वर्षों से भारत में रह रहे हैं, लेकिन बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तराखंड में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत नागरिकता देने की शुरुआत करने के बाद वे नागरिक बन गए। उनके अलावा पश्चिम बंगाल में रह रहे आठ लोगों को भी केंद्र से नागरिकता के दस्तावेज मिले हैं। 

बांग्लादेश के खुलना में उत्पीड़न से बचने के लिए भारत भागे गेन ने कहा कि कागजात मिलने पर उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्हें अपनी पहचान वापस सौंप दी गई हो। न्यूज18 ने अपनी एक रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा, "जिस दिन हम बांग्लादेश में प्रताड़ित होने के बाद सीमा पार कर आए, हमें कुछ सुकून मिला। लेकिन अनिश्चितता बनी रही। आज जब मुझे डाक से नागरिकता कार्ड मिला तो मैं बहुत खुश हुआ। मुझे अपनी पहचान वापस मिल गई है।" 

गेन के पास पहले से ही अपना वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड था, लेकिन पासपोर्ट और इमिग्रेशन केंद्रों पर ये कागजात पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने कहा, "हमें पासपोर्ट कार्यालय में अपमान का सामना करना पड़ा। लोगों के एक वर्ग ने हमसे कई तरह से जबरन वसूली भी की। अब मुझे खुशी है कि मेरे परिवार की आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी। मैं मोदी जी और अमित शाह जी को धन्यवाद देना चाहता हूं।”

गेन ने कहा कि उन्होंने 15 दिन पहले नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्होंने अपना आधार और वोटर आईडी विवरण और हिंदू होने का प्रमाण प्रस्तुत किया, जो कि उन्हें रामकृष्ण मिशन से मिला था। एक बार जब उन्होंने जानकारी अपलोड की तो उन्हें 27 मई को सत्यापन के लिए डाकघर बुलाया गया। उनके कागजात की जांच की गई और थोड़े इंतजार के बाद उन्हें डाक से अपना प्रमाण पत्र मिल गया।

आपको बता दें कि सीएए को दिसंबर 2019 में लागू किया गया था। इसके जरिए 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सताए गए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।