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27 अक्तूबर, 2020|3:53|IST

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1962 के सीमा विवाद के सहारे भारत को कमजोर बताने की बेकार कोशिश में जुटा चीन

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पिछले 58 वर्षों से, चीनी प्रचार विभागों या ने 1962 के सीमा संघर्ष का उपयोग भारतीय सेना को रक्षात्मक करने और बड़े पैमाने पर राष्ट्र को यह बताने के लिए किया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भारतीय सेना से बहुत बेहतर है और युद्ध के मैदान पर दमदार है।

यह वही मानसिकता है जिसने पीएलए को पैंगॉन्ग त्सो के उत्तरी तट पर फिंगर 4 पहाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ गालवान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को पार करने की हिम्मत दी है। हालाँकि, चीनी सेना ने गलवान के साथ-साथ झील के दोनों किनारों पर भारतीय सेना के प्रमुख पोस्टों पर कब्जा कर करने की कोशिश की है।

भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर महीनों से गतिरोध जारी है। चीनी सेना लगातार उकसावेपूर्ण हरकत कर रही है, जिसका भारतीय जवान मुंहतोड़ जवाब दे रहे। यह पूरी दुनिया को मालूम है कि जिनपिंग की सेना भारतीय जवानों को उकसाने का काम कर रही है, लेकिन चीन है जो 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाली हरकत कर रहा है। चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में उल्टा भारत पर ही सीमा पर उकसाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, चीन को भारत और अमेरिका की गाढ़ी दोस्ती भी रास नहीं आ रही है।

'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने लेख की शुरुआत अपनी आदत के अनुरूप झूठे दावे करते हुए की है। उसमें लिखा गया है, 'जून में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत ने ज्यादातर चीन के खिलाफ ही कार्रवाई की है। आर्थिक और सैन्य रूप में भारत चीन से पीछे है, लेकिन इसके बावजूद भी क्यों चीन को उकसाने का रिस्क ले रहा है?'

चीनी प्रोपेगैंडा मुखपत्र ने आगे बताया है कि भारत का मानना है कि चीन युद्ध शुरू करने या युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए पहल करने को तैयान नहीं है। इसी वजह से भारत सीमा पर छोटे पैमाने पर उकसावे का काम कर रहा है। वहीं, नई दिल्ली को लगता है कि चीन बड़े स्तर पर सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होगा, इसलिए वह अपने दृढ़ संकल्प के बारे में अपनी बात रखने की हिम्मत करता है।

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  • Web Title:1962 China trying to make India weak with the help of border dispute