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20 जनवरी, 2020|11:25|IST

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चिंताजनक : त्वरित न्याय के लिए 16 राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं

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दुष्कर्म और हत्या के संगीन कांडों से देश में उबाल आया हुआ है। लेकिन देश में 16 राज्य ऐसे हैं, जहां इन केसों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें नहीं बनाई गई हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और तेलंगाना शामिल है। हालांकि तेलंगाना ने हैदराबाद में पशु चिकित्सक के दुष्कर्म और हत्या के बाद इस अदालत को नामित कर दिया है।  लेकिन यह भी केंद्र सरकार द्वारा बार-बार भेजे गए स्मार-पत्रों के बाद बनाया गया है।

कानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इन राज्यों ने यौन अपराधों और पोक्सो ऐक्ट (बाल यौन उत्पीड़न) की सुनवाई के लिए बनाए जाने वाले फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट के लिए भेजे गए पत्रों पर संज्ञान भी नहीं लिया है। राज्यों का यह रुख ऐसे समय में हैं जब दुष्कर्म और हत्या के मामलों में बेहद बढ़ोतरी देखी जा रही है। खासकर हैदराबाद जैसी घटनाएं भी हैं। 

केंद्र सरकार ने इस वर्ष जुलाई में यौन और पोक्सो अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मुहिम छेड़ी थी, जिसमें देशभर में 1023 कोर्ट बनाए जाने थे। इन विशेष अदालतों में बलात्कार और पोक्सो ऐक्ट के 1,66,882 मामलों की सुनवाई होनी थी। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में 13 नवंबर को दिए एक आदेश में पोक्सो के 1,60,000 केसों को भी इन अदालतों में निपटाने के लिए कहा था। योजना शुरू होने के चार महीने के बाद 15 राज्यों ने इस योजना को अपनाने का फैसला लिया और केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इसके लिए उन्हें फंड की एक किश्त जारी कर दी। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस मद के लिए रखे गए 100 करोड़ रुपये में से 89.1 करोड़ कोर्ट नामित करने वाले रुपये राज्यों को आवंटित भी कर दिए गए।

इन प्रदेशों में विशेष अदालतें
विशेष त्वरित अदालतें बनाने वाले इन राज्यों में त्रिपुरा, झारखंड, नगालैंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, मणिपुर, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली शामिल हैं। मंत्रालय को हाल ही में चंडीगढ़ से भी फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए फंड के वास्ते एक आवेदन मिला है। केंद्र की इस योजना के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट एक वर्ष (2019-20-21) के लिए बनाए जाएंगे और जरूरत होने पर उन्हें विस्तारित किया जाएगा।

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  • Web Title:16 States Without Fast Track Court For Quick Justice