विशिष्ट नाट्य मंचन शृंखला का हिस्सा बनी काशी
वाराणसी में वंदेमातरम् का 150वां वर्ष पूरा होने पर एक ऐतिहासिक आयोजन हुआ। 'तरंग-तरंग तिरंगा बोले' नामक नाटक में भारतीयों के राष्ट्रगीत के प्रति प्रेम, सम्मान और भक्ति को प्रदर्शित किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ.केके त्रिपाठी की उपस्थिति में सामूहिक गायन भी हुआ।

वाराणसी। वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को हुए ऐतिहासिक आयोजन में काशी की भी सशक्त हिस्सेदारी रही। देश के 150 शहरों में एक ही दिन एक ही समय पर हुई नाट्य प्रस्तुतियों की शृंखला की एक कड़ी ‘तरंग-तरंग तिरंगा बोले’ नाटक बना। यह मंचन रवींद्रपुरी स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान में हुआ। नाटक में राष्ट्रगीत वंदेमातरम् एवं राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति भारतीयों के असीम प्रेम, त्याग, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रकाश और संगीत संयोजन से अतिरिक्त प्रभाव भी उत्पन्न किया गया। नाटक में वंदेमातरम् की गरिमा एवं राष्ट्रीय महत्व को विशेष प्राथमिकता दी गई।
नाटक का लेखन मंजीत चतुर्वेदी तथा निर्देशन उमेश भाटिया ने किया। मंच पर अनुराग कन्नौजिया ने पिंगली वेंकैया, आशीष भारद्वाज ने चित्तू पांडेय की भूमिका जीवंत की। अमन पाल, रौशन एवं सोनू पटेल ने अन्य महत्वपूर्ण किरदार निभाए। तनुश्री, मुस्कान एवं दीपिका ने आदिशक्ति एवं भारत माता के समन्वित स्वरूप को अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त किया। अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध प्रतिरोध को केंद्र में रख कर लिखे गए नाटक में राजवंशी ने सूत्रधार की भूमिका का सफल निर्वाहन किया।संस्कृति मंत्रालय, संगीत नाटक अकादमी तथा आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुए आयोजन में केवी.जनकल्याण ट्रस्ट एवं उमापति कल्चरल ट्रस्ट ने भी सहयोग किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ.केके त्रिपाठी रहे। संस्कार भारती के डॉ.रामवीर शर्मा और संगीत नाटक अकादमी के सदस्य जयंत चौधरी विशिष्ट अतिथि रहे। अंत में सभी अतिथियों, कलाकारों एवं उपस्थित दर्शकों ने वंदेमातरम् का सामूहिक गायन किया।


