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समय रहते पहल की जरूरत: भारत में मंदी के 15 लक्षण

15 signs of recession in india

दुनिया की कुछ दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अर्थव्यवस्था के ज्यादातर पैमानों पर गिरावट देखी जा रही है। अब और आगे गिरावट से बचने के लिए बड़ी पहल की दरकार है। समय रहते अर्थव्यवस्था में विकास की गति को बल देना होगा। पेश है अर्थशास्त्री विवेक कौल की रिपोर्ट, जिसमें थमती आर्थिक रफ्तार के प्रमुख 15 लक्षणों पर प्रकाश डाला गया है।

बारिश रुक गई है, तो आप घर से निकलते हैं, कुछ दूर जाते हैं। रास्ते पर आपको 500 का नोट पड़ा मिलता है। आप उसे उठाते हैं और पतलून की जेब में रख लेते हैं, यह सोचते हुए कि स्थानीय धर्मार्थ कार्य में दान कर देंगे। लेकिन आप जैसे ही किताब की दुकान पार कर रहे होते हैं, लोभ में पड़ जाते हैं और 500 रुपये की ताजा बेस्टसेलर किताब खरीद लेते हैं। किताब विक्रेता शराबी है, वह पैसे का इस्तेमाल उस दिन की शराब खरीदने में करता है। शराब विक्रेता उसी 500 के नोट के साथ स्थानीय सिनेमा हॉल पहुंचता है, अपनी पसंदीदा अभिनेत्री की नई फिल्म का टिकट खरीदता है। मनमानी कीमत वाले पॉपकोर्न और सॉफ्ट ड्रिंक भी खरीदता है। सिनेमा हॉल मालिक को एक शादी में शामिल होने दूर जाना है, वह उसी 500 रुपये का इस्तेमाल टैक्सी ड्राइवर को भुगतान के लिए करता है, क्योंकि उसका अपना ड्राइवर छुट्टी पर गया है। आप देख रहे हैं, 500 रुपये की शुरुआती गतिशीलता ने कैसे सबको फायदा दिया। शुरुआती 500 रुपये के चार बार खर्च होने से 2,000 रुपये की आर्थिक गतिविधि पैदा हुई। इसका अर्थ है, 500 रुपये के पहले योगदान ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2,000 रुपये जोड़ दिए। यदि आप उसी 500 रुपये को बैंक में जमा कर देते या अपनी जेब में रखे रहते, तो यह आर्थिक गतिविधि नहीं हो पाती। .

पारंपरिक रूप से जीडीपी एक देश के अंदर की समग्र वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन का समुच्य या माप है। जॉन लेंचेस्टर अपनी किताब हाउ टु स्पीक मनी में लिखते हैं, जीडीपी को एक माप के रूप में जितना देखा जा सकता है, उतना आकार के रूप में नहीं... यह अर्थव्यवस्था के माध्यम से और उसके आसपास धन की आवाजाही को मापती है; यह गतिविधि को मापती है। 

जो उदाहरण ऊपर साझा किया गया है, (वह लेंचेस्टर की किताब के उदाहरण से ही प्रेरित है) वह ठीक-ठीक यही दर्शाता है कि एक आर्थिक गतिविधि जीडीपी में कैसे योगदान देती है। यही वह गतिविधि है, जो 2019 की शुरुआत से ही धीमी पड़ रही है। इस वर्ष जीडीपी विकास जनवरी से मार्च तक मंदा पड़कर 5.8 प्रतिशत हो गया है। आइए, ऐसे 15 आर्थिक लक्षणों या संकेतों पर नजर फेरें और देखें कि अप्रैल से जून 2019 तक की आर्थिक गतिविधियां कैसे धीमी या मंद पड़ी हैं।

किसी भी अर्थव्यवस्था में जीडीपी के लिए नए निवेश बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनसे नए रोजगार के अवसर बनते हैं, जिससे कमाई बढ़ती है और खर्च भी। निवेश बढ़ने से आर्थिक विकास होता है। दुर्योग से अभी निवेश के मोर्चे पर चीजें सही नहीं दिख रही हैं।

1 : घरेलू कार बिक्री घटी

अप्रैल से जून 2019 और अप्रैल से जून 2018 की तुलना करें, तो कार बिक्री में 23.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्ष 2004 के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है। कार की बिक्री घटती है, तो इसका नकारात्मक असर टायर निर्माताओं से लेकर इस्पात और स्टीयरिंग निर्माताओं इत्यादि तक पड़ता है। बाह्य रूप से देखें, तो अनेक ऑटो डीलरशिप बंद हो रही है या सिमट रही है। वाहन ऋण वृद्धि भी कम होकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है।.

2 : दोपहिया बिक्री कम हुई

दोपहिया वाहनों की बिक्री भी प्रभावित हुई है। अप्रैल से जून 2019 के बीच दोपहिया वाहनों की बिक्री में 11.7 प्रतिशत की कमी आई है। यह अक्तूबर-दिसंबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। मोपेड भी नहीं बिक रहे हैं। उनकी बिक्री में 19.9 प्रतिशत की कमी आ गई है। .

3 : घटी ट्रैक्टर बिक्री .
ट्रैक्टर बिक्री ग्रामीण मांग की एक अच्छी सूचक है। अप्रैल से जून 2019 के दौरान ट्रैक्टर की बिक्री में 14.1 प्रतिशत की कमी आई है। यह गिरावट विगत चार वर्ष में सर्वाधिक है। .

4 : थमी आवास की खरीद .
रियल एस्टेट रिसर्च कंपनी एलएफ के अनुसार, मार्च 2019 तक भारत के टॉप 30 शहरों में 12.8 लाख अनबिके आवास थे। मार्च 2018 की तुलना में यह संख्या सात प्रतिशत ज्यादा है, तब 12 लाख अनबिके मकान थे। इसका अर्थ है, बिल्डर जिस गति से मकान बना रहे हैं, लोग उस गति से खरीद नहीं रहे। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े करीब 250 छोटे-बड़े उद्योग हैं। आवासों के बिकने से बड़े पैमाने पर उद्योग जगत को फायदा होता है, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। 

5 : बैंक खुदरा ऋण
यहां डाटा ट्रेंड के खिलाफ चला जाता है। अप्रैल से जून 2019 के बीच बैंकों द्वारा दिए जा रहे खुदरा ऋण में 16.6 प्रतिशत की बढ़त हुई है। पिछले वर्ष इसी दौरान 17.9 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। यहां विकास दर में मामूली गिरावट है। खुदरा ऋण में लगभग आधा हिस्सा गृह ऋण का होता है और गृह ऋण में 18.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष इसी दौरान 15.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। .

अब इसे कैसे समझा जाए कि गृह ऋण भी बढ़ रहे हैं और अनबिके मकानों की संख्या भी बढ़ रही है? ऐसा शायद इसलिए हो रहा है, क्योंकि लोग उन लोगों से आवास खरीद रहे हैं, जिन्होंने वर्ष 2003 और 2012 के बीच ज्यादा आवास खरीद लिए थे। लोग सीधे बिल्डर से नहीं खरीद रहे हैं। यह खरीद-बिक्री नए आवासों की नहीं हो रही है, इसलिए इससे वैसी आर्थिक गतिविधि नहीं होगी, जैसी नए मकान के बिकने से होती है। .

गृह ऋण के अलावा क्रेडिट कार्ड बकाया में भी 27.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह स्थिति पिछली बार की तुलना में अच्छी है। यहां यह बात समझने की है कि जब आप किसी से कहते हैं कि मंदी है, तो वह जवाब देता है, मॉल और रेस्तरां तो भरे पड़े हैं। एक खास वर्ग क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता है, और इस वर्ग की छोटी खरीदारियां भी कम नहीं हुई हैं। .

6 : रोजमर्रा के सामान की बिक्री .
एफएमसीजी (फास्ट मुविंग कंज्युमर गुड्स) अर्थात रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं की बिक्री धीमी पड़ी है। यदि हम हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के उत्पादों की बिक्री देखें, तो अप्रैल से जून 2019 के बीच विक्रय वृद्धि पांच प्रतिशत रही है, जबकि इस काल में पिछले वर्ष विक्रय वृद्धि 12 प्रतिशत थी। डाबर इंडिया की विक्रय वृद्धि दर देखें, तो यह पिछले वर्ष के 21 प्रतिशत से घटकर छह प्रतिशत हो गई है। यह चिंता की बात है कि लोगों ने रोजमर्रा की खरीदारी धीमी कर दी है। .

7 : तेल, सोने, चांदी का आयात
तेल, सोना, चांदी की मांग भी अच्छी संकेतक है कि लोग आयातित सामान खरीद रहे हैं। अप्रैल से जून 2019 के दौरान इन आयातों में 5.3 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इसी दौरान पिछले वर्ष इसमें 6.3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई थी।.

8 : घरेलू व्यावसायिक वाहन बिक्री

घरेलू व्यावसायिक वाहनों की बिक्री बढ़ती है, तो मूलभूत ढांचे और औद्योगिक मोर्चे पर लाभ होता है। इन वाहनों का उपयोग निर्मित या अर्द्धनिर्मित वस्तुओं के परिवहन के लिए होता है। अप्रैल से जून 2019 के दौरान इन वाहनों की बिक्री 9.5 प्रतिशत गिरी है। विगत पांच वर्षों में यह सर्वाधिक संकुचन है। इससे पता चलता है कि निवेश के मोर्चे पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। पिछले वर्ष इसी समय बिक्री 51.6 प्रतिशत बढ़ी थी। .

9 : उद्योगों को बैंक ऋण
हाल के दिनों में इसमें सुधार हुआ है। अप्रैल से जून 2019 में इसमें 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसमें बड़े उद्योगों के कर्ज का हिस्सा ज्यादा है, जिसमें 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम व लघु उद्योगों के लिए ऋण वृद्धि दर मात्र 0.6 प्रतिशत है। बड़े उद्योगों को ऋण देना अहम है, लेकिन मध्यम व लघु उद्योग भी जब बढ़ते हैं, तो बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं। .

10 : रेल माल भाड़ा राजस्व 
भारतीय रेलवे द्वारा ज्यादातर माल ढुलाई में कुछ निश्चित प्रकार के उत्पाद ज्यादा मात्रा में शामिल हैं, जैसे कोयला, कच्चा लोहा, सीमेंट, उर्वरक, पेट्रोलियम, लोह अयस्क इत्यादि। जब रेलवे इन वस्तुओं का ज्यादा परिवहन करता है, तो यह निवेश और औद्योगिक गतिविधियों का अच्छा संकेत है। अप्रैल से जून 2019 के बीच इस सूचक में 2.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है, यह विगत ढाई वर्ष का सबसे न्यूनतम स्तर है। .

11 : तैयार इस्पात की खपत
किसी भी तरह के भौतिक ढांचे में इस्पात की जरूरत पड़ती है। अत: इस्पात की खपत में तेजी निवेश गतिविधियों में बढ़त की सूचक है। अप्रैल से जून 2019 के बीच तैयार इस्पात की खपत 6.6 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि पिछले वर्ष 8.8 प्रतिशत बढ़ी थी। इस मोर्चे पर पिछले दो वर्ष की यह न्यूनतम गिरावट है।.

12 : नए निवेश की घोषणा
अप्रैल से जून 2019 के दौरान घोषित नई परियोजनाओं के मूल्य में 79.5 प्रतिशत की गिरावट है। यह सितंबर 2004 के बाद की सर्वाधिक गिरावट है। इसी तिमाही में घोषित निवेशों का मूल्य 71,337 करोड़ रुपये है, यह भी सितंबर 2004 के बाद न्यूनतम है। यह एक बड़ा संकेत है कि उद्योगों को भारत के आर्थिक भविष्य पर अभी ज्यादा विश्वास नहीं है। .

13 : निवेश परियोजनाओं की पूर्णता

इसी तिमाही में नई निवेश परियोजनाओं के पूरा होने में 48 प्रतिशत की कमी देखी गई है। यह भी सितंबर 2004 के बाद की सबसे बड़ी कमी है। इस तिमाही के दौरान जो परियोजनाएं पूरी हुई हैं, उनका मूल्य 69,494 करोड़ रुपये है, यह भी पिछले पांच वर्ष के न्यूनतम स्तर पर है। 

14 : सरकारी व्यय
पिछले दो वित्त वर्ष में सरकारी व्यय में 19.1 प्रतिशत और 13.2 प्रतिशत की बढ़त हुई है। यह बढ़त वित्तीय संकट के वर्ष 2008-2009 और 2009-2010 के बाद उच्चतम है। सरकारी व्यय में इस बढ़त से आर्थिक विकास को एक हद तक ताकत मिल रही है। अब आगे विकास में तेजी लाने के लिए सरकार को अपना व्यय बढ़ाना होगा और इसके लिए कर विकास जरूरी है। अप्रैल से जून 2019 के दौरान केंद्र सरकार के कुल कर राजस्व में महज 1.4 प्रतिशत या चार लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष इसी दौरान कुल कर राजस्व में 22.1 प्रतिशत का उछाल आया था।


15 : थमा हुआ निर्यात
इस तिमाही में भी निर्यात 46 अरब डॉलर पर बना हुआ है। निर्यात की यही स्थिति पिछले वर्ष की इस तिमाही में भी थी। अभी निर्यात के मोर्चे पर आर्थिक गतिविधि की बढ़त नहीं दिख रही है। 

साफ है, करीब-करीब सारे सूचक यही बताते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, आगे स्थितियां और बिगड़ेंगी। सरकार की बात करें, तो जब आप इस समस्या को स्वीकार ही नहीं कर रहे हैं, तो समाधान कैसे निकालेंगे?

अप्रैल-जून 2019 में दर्ज गिरावट

- 48 प्रतिशत घटा है तेल, सोने और चांदी आयात
 
- 1.4 प्रतिशत वृद्धि सरकार के कुल कर राजस्व में
 
- 48 प्रतिशत कमी हुई निवेश परियोजना पूर्णता में
 
- 6.6 प्रतिशत ही बढ़ी है तैयार इस्पात की खपत
 
- 14.1 प्रतिशत की कमी ट्रैक्टर बिक्री में दर्ज हुई
 
- 46 अरब डॉलर बना हुआ है कुल निर्यात
 
- 23.3 प्रतिशत की कमी आई है कार बिक्री में

- 11.7  प्रतिशत की कमी दोपहिया वाहन बिक्री में
 

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