DA Image
हिंदी न्यूज़ › देश › महामारी काल में जलवायु खतरों से प्रभावित हुए 14 करोड़ लोग, लू के थपेड़ों की चपेट में आए 66 करोड़
देश

महामारी काल में जलवायु खतरों से प्रभावित हुए 14 करोड़ लोग, लू के थपेड़ों की चपेट में आए 66 करोड़

मदन जैड़ा,नई दिल्लीPublished By: Mrinal Sinha
Sun, 19 Sep 2021 06:38 AM
महामारी काल में जलवायु खतरों से प्रभावित हुए 14 करोड़ लोग,  लू के थपेड़ों की चपेट में आए 66 करोड़

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (आईएफआरसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान चरम मौसमी घटनाओं के चलते दुनिया में करीब 14 करोड़ लोगों का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। कोरोना प्रभावित लोगों को राहत सहायता उपलब्ध कराने में मुश्किलें आई जिससे अभूतपूर्व मानवीय संकट पैदा हुआ।

शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार करीब 14 करोड़ लोग यानी रूस की पूरी आबादी के बराबर लोग महामारी के दौरान बाढ़, सूखा, तूफान और जंगल की आग से प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं दुनिया में 65 से अधिक और पांच साल से कम उम्र के 66 करोड़ लोग लू के थपेड़ों की चपेट में आ गए जो संयुक्त राज्य अमेरिका की आबादी का लगभग दोगुना है। इस दौरान 17,242 लोगों की मौते हुई।

कोविड की चपेट में आने के बाद से सबसे घातक घटना पश्चिमी यूरोप में 2020 की लू थी जिसमें बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और यूके में 11000 से अधिक मौतें हुईं। जबकि भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में दो करोड़ लोगों को अम्फान चक्रवात ने प्रभावित किया। इस दौरान दो बड़ी हीट वेब और जून 2020 में भीषण बाढ़ का सामना भारत ने किया। जिसमें दो हजार से अधिक लोगों की मौतें हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल हीटिंग ने कई विशिष्ट घटनाओं को शक्तिशाली, लंबा या अधिक संभावित बना दिया।

जलवायु परिवर्तन मौजूदा संवेदनशीलताओं और खतरों को बदतर बना देता है और इसने विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित किया है जो पहले से ही महामारी की वजह से संवेदनशील हैं। उदाहरण के लिए सीरिया और इराक में जारी सूखा पानी की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति दोनों को कम कर रहा है क्योंकि बांध सूख जाते हैं, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। कोरोना नियमों के चलते दक्षिण एशिया में तूफ़ान के दौरान विस्थापितों के लिए नए आश्रय स्थलों की तलाश करनी पड़ी ताकि सामाजिक दूरी बनाई जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और अन्य जगहों पर जंगल की आग से उत्पन्न धुएं ने लोगों के फेफड़ों को प्रभावित किया। इससे कोविड के मामलों और कोविड से होने वाली मौतों में वृद्धि हुई। आईएफआरसी का कहना है कि समुदायों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से जूझने के लिए और अधिक सहायता की आवश्यकता है। जलवायु और महामारी से एक साथ निपटने की भी जरूरत है।

संबंधित खबरें