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मोदी सरकार का बड़ा फैसला, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण

मोदी सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों [सामान्य वर्ग] के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार...

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण
Madanनई दिल्ली, एजेंसीMon, 07 Jan 2019 06:16 PM

मोदी सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों [सामान्य वर्ग] के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार इसके िलए  मंगलवार को लेकर सभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में संवैधानिक संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार इस बाबत मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 [कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018] लोकसभा में लेकर आएगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में संशोधन किया जाएगा। सवर्णों को दिया जाने वाला आरक्षण मौजूदा 50 फीसदी आरक्षण से अलग होगा।

पात्रता के लिए जरूरी मानक
सूत्रों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को परिभाषित करने के लिए कई मानक तय किए जाएंगे। जिन परिवारों की आय आठ लाख रूपए सालाना से कम होगी वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे में आएंगे। मूलत यह ओबीसी आरक्षण में लागू िक्रमी लेयर की सीमा है, इसी को आधार बनाया गया है।  इसके अलावा जिनकी कृषि योग्य भूमि पांच एकड़ से कम होगी उन्हें इसके दायरे में रखा जाएगा। अन्य मानकों में पात्रता के लिए आवासीय घर [रेजीडेंसियल हाउस] एक हजार वर्ग फिट से कम होना चाहिए। अधिसूचित नगरपालिका में सौ गज से कम का प्लॉट होने पर ही आरक्षण का लाभ पा सकेंगे। गैर अधिसूचित नगरपालिका इलाके में आवासीय प्लॉट की सीमा 200 गज रखी गई है।

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संवैधानिक संशोधन जरूरी
 सूत्रों का कहना है कि आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से अलग होगा इसलिए संवैधानिक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई से अधिक बहुमत से विधेयक पारित कराया जाना जरूरी है। संसद के दोनों सदनों मे पारित होने के बाद इस विधेयक पर कम से कम 50 फीसदी राज्यों में विधानसभा की मंजूरी जरूरी है।

सियासी रूप से गेमचेंजर हो सकता है फैसला
सरकार के सूत्र इस फैसले को सियासी रूप से गेमचेंजर मान रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इस फैसले को तुरुप का पत्ता माना जा रहा है।

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