पांच वर्ष में आठ करोड़ छोटे उद्योग पंजीकृत हुए
बीते पांच वर्षों में 1.42 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) बंद हुए हैं, जिनसे 10.26 लाख श्रमिक जुड़े हुए थे। सरकार ने बताया है कि बड़े कंपनियों द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने के कारण एमएसएमई बंद होने के कई कारणों में से एक है। हालांकि, पांच वर्षों में 8.02 करोड़ नए उद्योग भी पंजीकृत हुए हैं।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। देश भर में बीते पांच वर्षों के दौरान 1.42 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) बंद हुए हैं, जिनसे 10.26 लाख श्रमिक जुड़े हुए थे। सरकार कहती है कि भले ही काफी संख्या में एमएसएमई बंद हुए हैं लेकिन पांच वर्षों के दौरान 8.02 करोड़ नए उद्योग भी सरकार के पोर्टल पर पंजीकृत हुए हैं। एमएसएमई के बंद होने के पीछे कई कारण हैं लेकिन एक प्रमुख कारण समय पर बड़ी कंपनियों द्वारा भुगतान न किए जाना भी शामिल है। हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि किसी भी इकाई के बंद या डी-रजिस्टर होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कंपनी के मालिक का बदलना, सर्टिफिकेट की जरूरत खत्म होना, डुप्लीकेट पंजीकरण या वास्तविक रूप से व्यवसाय का बंद होना। हालांकि एमएसएमई के बंद होने के पीछे एक मुख्य कारण समय पर बड़ी कंपनियों द्वारा भुगतान न किए जाने भी है क्योंकि भुगतान समय पर न होने की वजह से छोटे उद्योगों के सामने फंड की कमी होती है। लंबे समय तक फंड की कमी होने पर उन्हें कारोबार बंद करना पड़ता है या फिर बदलना पड़ता है।
सरकार के आंकड़े
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजराज, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बंद हुए हैं लेकिन साथ में नए एमएसएमई पंजीकृत होने के मामले में इन राज्यों को प्रदर्शन भी अच्छा रहा है। नए पंजीकृत एमएसएमई में करीब 35.31 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
एमएसएमई को समय पर भुगतान नहीं, शिकायतें दर्ज
निजी क्षेत्र से जुड़ी बड़ी कंपनियां एमएसएमई फर्मों का समय पर भुगतान नहीं कर रही हैं। भुगतान संबंधी विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने 27 जून 2025 को ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल शुरू किया। 15 अक्टूबर 2025 से विलंब वाले भुगतान के सभी नए मामले पोर्टल पर दर्ज किए। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े बताते हैं कि 15 जुलाई 2026 तक पोर्टल पर 26997 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में एमएसएमई भुगतान समय से न मिलने की समस्या से जूझ रही है।
राज्यवार बीते पांच साल में एमएसएमई बंद प पंजीकृत होने की स्थिति
राज्य पंजीकृत बंद हुए
महाराष्ट्र 97.19 लाख 33,906
तमिलनाडु 60.73 लाख 16,687
गुजरात 42.17 लाख 12,769
राजस्थान 43.23 लाख 11,279
उत्तर प्रदेश 86.42 लाख 7,313
कर्नाटक 49.58 लाख 7,523
मध्य प्रदेश 48.23 लाख 6,034
पश्चिम बंगाल 53.63 लाख 5,587
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भुगतान पर कड़ी निगरानी, लेकिन फिर भी मुश्किलें
सरकार एमएसएमई का भुगतान समय पर कराने की दिशा में कई कदम उठा रही है। सात नवंबर 2024 को सरकार ने अधिसूचना जारी की कि 250 करोड़ रुपये या उससे अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों और सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए ट्रेस रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम से जुड़ना अनिवार्य किया गया। हाल ही में 30 जून से सरकार ने प्रावधान किया है कि केंद्रीय उपक्रम और कंपनियों के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से ऑनबोर्ड करने का निर्देश दिया। सरकार का मानना है कि इससे एमएसएमई को समय पर भुगतान मिलने में मदद मिलेगी। हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि काफी बड़ी कंपनियां एमएसएमई से अपना काम करा ले रही हैं और भुगतान को बिना किसी ठोस कारण के अटका रही हैं।


