ब्रह्मपुत्र के नीचे टनल, ऊपर दहाड़ेंगे फाइटर जेट्स… चीनी सीमा के पास भारत की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शनिवार को असम में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें ब्रह्मपुत्र नदी पर बना पुल और आईआईएम गुवाहाटी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला एक डेटा केंद्र भी शामिल है।

पूर्वोत्तर में चीन और बांग्लादेश जैसे देशों से मिलती चुनौतियों को देखते हुए भारत असम और अरुणाचल सहित नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हाल के कुछ महीनों में इस दिशा में अहम प्रगति हुई है। यहां चीन सीमा से सटे राज्यों में बुनियादी ढांचे को तेज गति से मजबूत किया जा रहा है। अंडरवाटर टनल से लेकर हाईवे पर इमर्जेंसी लैंडिंग सुविधा तक कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मोरान में भारतीय वायुसेना के हरक्यूलिस सी130जे विमान से हाईवे पर बने इमर्जेंसी रनवे पर उतरकर इसकी शुरुआत की। इस दौरान सुखोई 30 एमकेआई, राफेल और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ने फ्लाईपास्ट किया। यह पूर्वोत्तर में इस तरह की पहली हाईवे आधारित इमर्जेंसी लैंडिंग सुविधा है। गुवाहाटी में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मोरान में हाईवे पर वायुसेना विमान की लैंडिंग असम की बढ़ती ताकत को दिखाती है। उन्होंने कहा कि पहले पूर्वोत्तर टूटी सड़कों के लिए जाना जाता था, आज यहां ऐसे हाईवे बन रहे हैं जहां विमान भी उतर सकते हैं।
देश की पहली अंडरवाटर रोड-सह-रेल टनल
इसके अलावा कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने गोहपुर एनएच15 से नुमालीगढ़ एनएच715 तक चार लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड सड़क और ब्रह्मपुत्र के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी सड़क-सह-रेल टनल को मंजूरी दी है। इस पर करीब 18,662 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। फिलहाल नुमालीगढ़ से गोहपुर की दूरी करीब 240 किलोमीटर है और कालीाभोमोरा पुल से होकर छह घंटे लगते हैं।
यह देश की पहली अंडरवाटर रोड-सह-रेल टनल और दुनिया की दूसरी ऐसी टनल होगी। इससे असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को फायदा होगा। माल की ढुलाई आसान होगी, लॉजिस्टिक लागत घटेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
बॉर्डर तक पहुंच होगी आसान
इससे पहले 9 मार्च 2024 को 825 करोड़ रुपये की लागत से बने सेला टनल प्रोजेक्ट का भी उद्घाटन हुआ था। इसमें दो टनल और 8.780 किलोमीटर की अप्रोच रोड शामिल है। कुल लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है। एक टनल 980 मीटर लंबी सिंगल ट्यूब है और दूसरी 1.5 किलोमीटर लंबी है, जिसमें इमर्जेंसी के लिए एस्केप ट्यूब भी है। 13,000 फीट की ऊंचाई पर बना यह दुनिया का सबसे लंबा दो लेन टनल है। यह 4,200 मीटर ऊंचे सेला पास के नीचे बनाया गया है, जो अक्सर बर्फबारी और भूस्खलन के कारण बंद रहता था। अब तवांग और चीन सीमा से सटे अग्रिम इलाकों तक सालभर पहुंच संभव होगी, जिससे सेना की रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी। बता दें कि चीन तवांग पर अपना दावा करता रहा है।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के मुताबिक 1,800 किलोमीटर लंबा ट्रांस अरुणाचल हाईवे तवांग से लोंगडिंग तक फैला है, जिससे ट्रेवलिंग टाइम काफी कम हुआ है। जहां पहले 12 घंटे लगते थे, अब पांच घंटे में पहुंचा जा सकता है। उन्होंने कहा है कि फ्रंटियर हाईवे प्रोजेक्ट को भी केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है।
सीमावर्ती गांवों को जोड़ने की पहल
इसके अलावा 2021 में केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम भी शुरू किया है। इसके तहत सीमावर्ती गांवों में कनेक्टिविटी, रोजगार और बुनियादी ढांचा बेहतर करने पर काम चल रहा है। इसके तहत सीमा पर मौजूद गांवों को ऑल-वेदर रोड से जोड़ने, 24x7 सोलर/विंड एनर्जी, और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर भी काम चल रहा है।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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